उत्तर प्रदेश

AMU Teacher Murder Case: ‘मुनीर गैंग’ के खूनी प्रतिशोध की दहलीज पर अलीगढ़, जानें पूरा मामला…

AMU Teacher Murder Case: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के शांत परिसर में 24 दिसंबर की वह शाम किसी खौफनाक मंजर में बदल गई, जब कंप्यूटर शिक्षक राव दानिश अली की ताबड़तोड़ गोलियों से हत्या कर दी गई। दानिश जब अपने साथियों के साथ लाइब्रेरी कैंटीन के पास टहल रहे थे, तभी उन पर घात लगाकर हमला किया गया। इस हत्याकांड ने पूरे (University Campus Security) तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी गैंगवार से कम नहीं हैं, जिसमें पुरानी रंजिश और मुखबिरी के शक ने एक निर्दोष शिक्षक की जान ले ली।

AMU Teacher Murder Case
AMU Teacher Murder Case

सोशल मीडिया पर गैंग की धमक और प्राइवेट आईडी

हत्याकांड के खुलासे के बाद इस केस का सबसे हैरान करने वाला पहलू डिजिटल साक्ष्य के रूप में सामने आया है। मुनीर गैंग की कमान संभाल रहे शूटर जुबैर ने ‘देवराज गैंग अलीगढ़’ के नाम से एक इंस्टाग्राम आईडी बना रखी थी। इसी आईडी से जुबैर ने 8 अक्टूबर को उसी घटनास्थल (एएमयू कैंटीन) से फोटो शेयर कर खुली धमकी दी थी। जैसे ही पुलिस ने (Instagram Forensic Investigation) शुरू की और गैंग के करीबियों पर शिकंजा कसा, अचानक यह आईडी पब्लिक से प्राइवेट कर दी गई। पुलिस अब जुबैर के उन डिजिटल निशानों को ढूंढ रही है जो वह पीछे छोड़ गया है।

मुखबिरी के शक में सात साल बाद लिया बदला

जांच में यह बात उजागर हुई है कि इस पूरी साजिश के पीछे जुबैर और उसके दो भाई, यासिर और फहद शामिल हैं। साल 2018 में शाहबेज नाम के युवक की हत्या हुई थी, जिसके बाद जुबैर को शक था कि राव दानिश ने पुलिस के लिए मुखबिरी की थी। जुबैर पिछले साल जुलाई में ही (Seven Years Imprisonment) काटकर जेल से बाहर आया था। जेल की सलाखों के पीछे उसने सात साल तक दानिश के खिलाफ नफरत पाली और बाहर आते ही अपने भाइयों के साथ मिलकर शिक्षक की हत्या की साजिश को अंजाम दे दिया।

आतिफ की मौत और गैंगवार की बायो स्टेटस

बेशक जुबैर ने अपनी इंस्टाग्राम आईडी प्राइवेट कर दी है, लेकिन उसके बायो स्टेटस ने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं। बायो में साफ लिखा है— “अपने भाई का बदला जरूर लेंगे, आतिफ का बदला जरूर होगा, अलीगढ़ का बाप।” दरअसल, जनवरी 2021 में जुबैर के करीबी दोस्त और एएमयू छात्र आतिफ की हत्या हुई थी। पुलिस का मानना है कि जुबैर (Gang War Retaliation) की आग में जल रहा है और उसने दानिश की हत्या को उसी बदले की कड़ी के रूप में देखा। बायो में लिखी धमकियां शहर में एक और बड़े गैंगवार की आहट दे रही हैं।

कौन है देवराज और क्या है सलमान का कनेक्शन

जिस ‘देवराज गैंग’ के नाम से जुबैर दहशत फैला रहा है, वह देवराज उर्फ राहत उसका बेहद करीबी दोस्त है। देवराज मूल रूप से बिहार के चंपारण का रहने वाला है और फिलहाल फरार है। पुलिस ने इस मामले में दानिश के ही पड़ोसी सलमान कुर्ते वाला को (Criminal Conspiracy Help) के आरोप में जेल भेजा है। सलमान का भाई मामून भी इस गैंग का हिस्सा था, जिसकी 2020 में एएमयू परिसर में गोली लगने के बाद मौत हो गई थी। रिश्तों और दोस्ती का यह ताना-बाना अलीगढ़ में अपराध की एक गहरी जड़ को दर्शाता है।

दिल्ली से अलीगढ़ तक शूटरों का नेटवर्क

जुबैर और उसके भाई यासिर-फहद दिल्ली के ओखला इलाके में ठिकाना बनाए हुए थे। जुबैर का इतिहास पुराना रहा है; 2019 में जब वह दिल्ली पुलिस द्वारा लूटा गया था, तब उसने रिमांड के दौरान अलीगढ़ में पुलिस पर गोली तक चला दी थी। उसके संबंध (Interstate Criminal Network) और गाजियाबाद के कुख्यात अपराधियों से भी उजागर हुए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह गिरोह जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई जैसे बड़े सिंडिकेट से भी जुड़ चुका है या नहीं।

8 दिसंबर का वो वीडियो और पुलिस की उलझन

पुलिस को जुबैर के इंस्टाग्राम अकाउंट से 8 दिसंबर का एक वीडियो मिला है, जिसमें उसने अलीगढ़ आने का जिक्र किया था। हालांकि, 24 दिसंबर यानी (Incident Day Inpatient) को वह अलीगढ़ में मौजूद था या नहीं, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। उसके भाई फहद और यासिर के पास जो मोबाइल नंबर मिला है, वह कभी जुबैर भी इस्तेमाल करता था। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के जरिए कड़ियां जोड़ने में जुटी है ताकि इन हिस्ट्रीशीटर भाइयों की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सके।

कड़ियां जोड़ने में जुटी अलीगढ़ पुलिस

एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक का कहना है कि पुलिस का पूरा ध्यान अब यासिर, फहद और जुबैर की गिरफ्तारी पर है। दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर साझा ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या (Ransom and Extortion) या किसी और विवाद के चलते दानिश को निशाना बनाया गया। दानिश के करीबियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या किसी व्यापारी या महिला को लेकर भी इन भाइयों का दानिश से कोई पुराना विवाद रहा था

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