Rajya Sabha Rule 267 – मानसून सत्र में गतिरोध की बड़ी वजह बना विशेष प्रावधान
Rajya Sabha Rule 267- संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में जारी गतिरोध के केंद्र में नियम 267 बना हुआ है। विपक्ष लगातार इस विशेष संसदीय प्रावधान के तहत 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहा है। वहीं, सभापति अब तक इन नोटिसों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसी कारण सदन की कार्यवाही कई दिनों से प्रभावित हो रही है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।

क्या है नियम 267 और क्यों माना जाता है विशेष
राज्यसभा की कार्यवाही में नियम 267 को एक असाधारण संसदीय प्रावधान माना जाता है। यदि सभापति इस नियम के तहत किसी नोटिस को मंजूरी देते हैं, तो उस दिन का निर्धारित सरकारी और विधायी कार्य स्थगित कर केवल उसी विषय पर चर्चा कराई जाती है। यही कारण है कि इसे सामान्य चर्चा की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है। इस नियम का उपयोग केवल उन परिस्थितियों में किया जाता है, जिन्हें अत्यंत महत्वपूर्ण और तत्काल विचार योग्य माना जाए।
विपक्ष इसी नियम पर क्यों दे रहा जोर
विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई को छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय है। उसके अनुसार, इस मामले पर सामान्य प्रक्रिया के बजाय नियम 267 के तहत व्यापक चर्चा होनी चाहिए, ताकि सदन पूरा समय इसी मुद्दे पर विचार कर सके। विपक्ष का मानना है कि सीमित अवधि की चर्चा इस विषय की गंभीरता के अनुरूप नहीं होगी।
नियम 176 से कैसे अलग है यह प्रावधान
संसदीय प्रक्रिया में नियम 176 के तहत भी किसी महत्वपूर्ण विषय पर अल्पकालिक चर्चा कराई जा सकती है। हालांकि इस व्यवस्था में चर्चा का समय सीमित रहता है और सदन का नियमित कामकाज भी जारी रहता है। इसके विपरीत, नियम 267 लागू होने पर पूरे दिन की कार्यसूची रोककर केवल संबंधित विषय पर बहस होती है। यही वजह है कि विपक्ष इस विशेष प्रावधान के इस्तेमाल की मांग कर रहा है।
पिछले 36 वर्षों में बहुत कम हुआ उपयोग
संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले लगभग 36 वर्षों में नियम 267 के तहत केवल 11 बार चर्चा की अनुमति दी गई है। वर्ष 1990 से 1992 के बीच तत्कालीन सभापति शंकर दयाल शर्मा के कार्यकाल में चार अवसरों पर इस नियम का उपयोग हुआ। इसके बाद भैरों सिंह शेखावत के कार्यकाल में तीन और हामिद अंसारी के कार्यकाल में चार बार इस प्रावधान के तहत बहस कराई गई। वर्ष 2016 में नोटबंदी के मुद्दे पर इस नियम के तहत अंतिम बार चर्चा की अनुमति दी गई थी।
पहले किन मुद्दों पर हुई थी बहस
इस विशेष संसदीय प्रावधान का उपयोग अतीत में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर किया गया है। इनमें बेमौसम बारिश और कृषि संकट, निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा, विदेशों में काले धन का मुद्दा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े मामले और खाड़ी युद्ध जैसी परिस्थितियां शामिल रही हैं। इन उदाहरणों को देखते हुए माना जाता है कि नियम 267 का इस्तेमाल केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाता है।
सभापति का रुख क्या है
सभापति का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां नियम 267 लागू करने के लिए आवश्यक असाधारण मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। इसी वजह से विपक्ष की ओर से दिए जा रहे नोटिस लगातार स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष अपने रुख पर कायम है और इसी प्रावधान के तहत चर्चा कराने की मांग दोहरा रहा है। ऐसे में नियम 267 को लेकर बना यह मतभेद मानसून सत्र में राज्यसभा के गतिरोध की प्रमुख वजह बना हुआ है।