Thirumavalavan – उपचुनाव और मंत्री पद की अटकलों पर दिया स्पष्ट जवाब
Thirumavalavan – वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने मंगलवार को अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार में मंत्री बनने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। उनका यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि वह तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

यह सीट मुख्यमंत्री विजय द्वारा खाली की गई थी। विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत हासिल करने के बाद विजय ने पेरम्बूर सीट अपने पास रखी और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट छोड़ दी थी, जिसके बाद संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी।
वीडियो संदेश के जरिए दी स्थिति स्पष्ट
थिरुमावलवन ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में उपचुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके निर्णय को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए और वह अपने रुख पर पूरी तरह कायम हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों के बावजूद उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने का कोई विचार नहीं बनाया है। साथ ही उन्होंने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील भी की।
प्रस्ताव मिलने की बात स्वीकार की
वीसीके नेता ने बताया कि उन्हें खाली हुई सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला था। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने की स्थिति में मंत्री पद की संभावना भी उनके सामने रखी गई थी।
हालांकि उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और इसके लिए मुख्यमंत्री विजय का आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार यह उनका व्यक्तिगत और राजनीतिक निर्णय है, जिसे उन्होंने पूरी सोच-विचार के बाद लिया है।
सरकार गठन में निभाई थी भूमिका
विधानसभा चुनाव के बाद वीसीके ने अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया था। इस राजनीतिक समर्थन ने सरकार गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
थिरुमावलवन ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह समर्थन दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले से पहले उन्होंने विभिन्न राजनीतिक नेताओं से चर्चा की थी।
पहले रहे थे विजय के आलोचक
वीसीके प्रमुख ने स्वीकार किया कि चुनाव से पहले वह विजय और उनकी पार्टी के प्रमुख आलोचकों में शामिल थे। उन्होंने उस समय कई मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से असहमति भी जताई थी।
हालांकि चुनाव परिणामों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच उन्होंने समर्थन का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय व्यापक राजनीतिक परिस्थितियों और राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।
सत्ता नहीं, विचारधारा को दी प्राथमिकता
थिरुमावलवन ने कहा कि उनका राजनीतिक सफर सत्ता या पद हासिल करने के लिए नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय, जनता के अधिकार और वैचारिक प्रतिबद्धता उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कोई भूमिका निभानी होगी तो उसके लिए विधायक बनना या मंत्री पद प्राप्त करना जरूरी नहीं है। उनके अनुसार राजनीति में उनकी प्राथमिकता सिद्धांतों और जनहित के मुद्दों पर काम करना है।
समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
अपने संदेश के अंत में वीसीके प्रमुख ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि उनके चुनाव लड़ने या मंत्री बनने से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि उनका निर्णय स्पष्ट है और वह उपचुनाव की दौड़ में शामिल नहीं होंगे।