स्वास्थ्य

AllergyCare – हे फीवर का संकेत है बदलते मौसम में बार-बार छींक आना…

AllergyCare – मौसम बदलते ही अगर आपको लगातार छींकें आने लगती हैं, नाक बहने लगती है या आंखों में खुजली महसूस होती है, तो इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार ये लक्षण हे फीवर यानी एलर्जिक राइनाइटिस के हो सकते हैं। यह समस्या खासतौर पर मौसम में बदलाव, धूल, प्रदूषण और परागकणों के संपर्क में आने पर बढ़ जाती है। दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग इस एलर्जी से प्रभावित हैं और कई मामलों में लोग इसकी सही पहचान नहीं कर पाते।

क्या होता है हे फीवर?

हे फीवर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी एक एलर्जिक प्रतिक्रिया है। जब शरीर किसी सामान्य चीज जैसे धूल, फफूंदी, परागकण या पालतू जानवरों के बालों को हानिकारक मान लेता है, तब शरीर उसके खिलाफ प्रतिक्रिया देने लगता है। इसी कारण छींक, नाक बहना और आंखों में जलन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक, लोग अक्सर इसे वायरल संक्रमण समझ लेते हैं, जबकि इसका कारण वायरस नहीं बल्कि एलर्जी पैदा करने वाले तत्व होते हैं। यही वजह है कि कई बार दवा लेने के बावजूद समस्या बार-बार लौट आती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

हे फीवर के लक्षण कई बार सामान्य सर्दी से मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जो इसे अलग बनाते हैं। लगातार छींक आना, नाक बंद रहना, आंखों में पानी आना और खुजली होना इसके आम लक्षण माने जाते हैं। कुछ लोगों को गले में खराश, सिरदर्द और कानों में भारीपन भी महसूस हो सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन लोगों को अस्थमा की समस्या होती है, उनमें हे फीवर सांस लेने में दिक्कत और खांसी को बढ़ा सकता है। इसके अलावा आंखों के नीचे सूजन, गले और मुंह में खुजली तथा लगातार थकान महसूस होना भी एलर्जी के संकेत हो सकते हैं।

सर्दी-जुकाम और हे फीवर में क्या फर्क है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होता है और आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। इसके साथ शरीर में दर्द, कमजोरी और हल्का बुखार भी हो सकता है। दूसरी ओर, हे फीवर में बुखार आमतौर पर नहीं होता और लक्षण तब तक बने रह सकते हैं जब तक व्यक्ति एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में रहता है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर हर मौसम बदलने पर एक जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो यह एलर्जी की तरफ इशारा हो सकता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

बचाव के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं

हे फीवर से पूरी तरह बचना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर इसके असर को कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन लोगों को परागकणों से एलर्जी है, उन्हें मौसम बदलने के दौरान बाहर कम निकलना चाहिए। घर की खिड़कियां बंद रखना और बाहर से आने के बाद हाथ-मुंह अच्छी तरह साफ करना भी फायदेमंद माना जाता है।

घर में धूल जमा न होने देना, नियमित सफाई करना और साफ वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है। अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो बिना देरी डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए ताकि सही इलाज समय पर शुरू हो सके।

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