RiceExport – वैश्विक चुनौतियों के बीच पांच फीसदी बढ़ा भारत का चावल निर्यात
RiceExport- वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारत के चावल निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून के बीच देश का कुल चावल निर्यात 5 प्रतिशत बढ़कर 12.27 दस लाख मीट्रिक टन पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 11.68 दस लाख मीट्रिक टन था। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय निर्यात में यह वृद्धि वैश्विक कृषि व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत हिस्सेदारी
भारत लंबे समय से दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक बना हुआ है और वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। यह हिस्सा थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे प्रमुख निर्यातक देशों के संयुक्त निर्यात से भी अधिक बताया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय चावल की निरंतर आपूर्ति से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर संतुलन बना रह सकता है। साथ ही, एल नीनो जैसे मौसम संबंधी जोखिमों के बावजूद कई विकासशील देशों को सस्ती दरों पर चावल मिलने की संभावना बनी हुई है।
बासमती निर्यात में आई गिरावट
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस अवधि में बासमती चावल के निर्यात में 5.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसका निर्यात घटकर 3.36 दस लाख मीट्रिक टन रह गया। बताया जा रहा है कि ईरान सहित कुछ खाड़ी देशों में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने से इस श्रेणी के निर्यात पर असर पड़ा। हालांकि, यह गिरावट कुल चावल निर्यात की गति को रोक नहीं सकी।
गैर-बासमती चावल की मांग रही मजबूत
बासमती की तुलना में गैर-बासमती चावल ने बेहतर प्रदर्शन किया। इस श्रेणी का निर्यात 9.6 प्रतिशत बढ़कर 8.9 दस लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। अफ्रीकी देशों से बढ़ी मांग को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। भारत मुख्य रूप से बांग्लादेश, बेनिन, आइवरी कोस्ट, गिनी और कैमरून जैसे देशों को गैर-बासमती चावल की आपूर्ति करता है, जहां इसकी लगातार मांग बनी हुई है।
प्रतिस्पर्धी कीमतों से मिला निर्यात को सहारा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास चावल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इसी वजह से भारतीय चावल की कीमतें थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार जैसे अन्य प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं। वहीं, प्रीमियम श्रेणी का बासमती चावल सऊदी अरब, इराक, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में निर्यात किया जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद गैर-बासमती चावल की मजबूत मांग ने कुल निर्यात को संतुलित बनाए रखा।
मक्का और गेहूं के निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी
चावल के अलावा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। इस दौरान भारत का मक्का निर्यात लगभग 400 प्रतिशत बढ़कर 1.42 दस लाख मीट्रिक टन पहुंच गया। रिकॉर्ड उत्पादन और घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण वियतनाम, बांग्लादेश और मलेशिया जैसे देशों से मांग बढ़ी। वहीं, गेहूं का निर्यात भी पिछले वर्ष के 1,463 टन की तुलना में बढ़कर 1,61,187 टन हो गया। नेपाल की ओर से बढ़ी खरीद और निर्यात संबंधी प्रतिबंधों में ढील को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।