ReviewSeries – दमदार शुरुआत के बावजूद अंत में कमजोर पड़ती दिखी क्राइम सीरीज
ReviewSeries – पुलिस की बहादुरी, अपराध की दुनिया और सियासी साजिशों पर आधारित वेब सीरीज दर्शकों को हमेशा आकर्षित करती रही हैं। इसी कड़ी में आई ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ का दूसरा सीजन एक बार फिर एक्शन और सस्पेंस से भरी कहानी लेकर लौटा है। पहले सीजन को दर्शकों ने काफी पसंद किया था, ऐसे में नए भाग से उम्मीदें भी ज्यादा थीं। इस बार कहानी केवल अपराधियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सिस्टम के भीतर छिपे विश्वासघात और राजनीतिक दांवपेंच को भी सामने लाती है।

कहानी में इस बार बढ़ा सियासी और गैंगवार का दायरा
सीरीज की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां पिछला भाग खत्म हुआ था। यूपी एसटीएफ अधिकारी अविनाश मिश्रा एक बार फिर अपराध के खिलाफ मोर्चा संभालते दिखाई देते हैं। इस बार उनका सामना केवल बाहरी अपराधियों से नहीं, बल्कि अपने विभाग के भीतर मौजूद साजिशों से भी होता है। कहानी में बीहड़, गैंगवार और राजनीतिक गठजोड़ को विस्तार से दिखाया गया है, जिससे घटनाक्रम ज्यादा गंभीर और वास्तविक लगता है।
सीरीज धीरे-धीरे अपने किरदारों और घटनाओं को स्थापित करती है। हर एपिसोड में नए मोड़ आते हैं, जिससे दर्शकों की दिलचस्पी बनी रहती है। स्क्रिप्ट की खास बात यह है कि घटनाएं बनावटी नहीं लगतीं और कई दृश्य वास्तविक पुलिस ऑपरेशन की तरह महसूस होते हैं।
रणदीप हुड्डा ने फिर दिखाई मजबूत पकड़
अविनाश मिश्रा के किरदार में रणदीप हुड्डा एक बार फिर प्रभाव छोड़ते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज, संवाद बोलने का अंदाज और एक्शन सीक्वेंस किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं। उन्होंने एक सख्त लेकिन संवेदनशील पुलिस अधिकारी की भूमिका को संतुलित तरीके से निभाया है।
उर्वशी रौतेला का किरदार शुरुआत में थोड़ा सीमित लगता है, लेकिन आगे जाकर कहानी में उनकी मौजूदगी का असर दिखाई देता है। अमित सियाल ने अपने किरदार को काफी मजबूती दी है और कई दृश्यों में वे प्रभावशाली नजर आते हैं। अभिमन्यु सिंह ने कम संवाद मिलने के बावजूद अपने हावभाव से खलनायक की भूमिका को असरदार बनाया है। अन्य कलाकारों ने भी अपने हिस्से के किरदारों के साथ न्याय किया है।
निर्देशन की शुरुआत मजबूत लेकिन अंत थोड़ा कमजोर
निर्देशक नीरज पाठक ने शुरुआती एपिसोड को काफी संतुलित तरीके से पेश किया है। पहले छह एपिसोड में कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और हर किरदार की अहमियत महसूस होती है। सस्पेंस और एक्शन का मिश्रण दर्शकों को बांधे रखता है।
हालांकि, सातवें एपिसोड के बाद सीरीज की रफ्तार अचानक तेज हो जाती है। कुछ घटनाएं जल्दबाजी में समेटी हुई लगती हैं। आखिरी हिस्से में कई गंभीर घटनाओं का असर उतना गहरा नहीं रह जाता जितना शुरुआत में बनाया गया था। यही वजह है कि मजबूत शुरुआत के बाद क्लाइमैक्स थोड़ा कमजोर महसूस होता है।
एक्शन और सस्पेंस पसंद करने वालों के लिए अच्छी पेशकश
‘इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2’ कुल दस एपिसोड की सीरीज है। अगर दर्शक एक्शन, पुलिस जांच और क्राइम थ्रिलर पसंद करते हैं तो यह सीरीज उन्हें पसंद आ सकती है। कहानी लंबी जरूर लगती है, लेकिन हर एपिसोड में कोई न कोई नया मोड़ देखने को मिलता है।
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसकी वास्तविकता से जुड़ी प्रस्तुति और कलाकारों का अभिनय है। कुछ कमियों के बावजूद यह दर्शकों को अंत तक जोड़े रखने में सफल रहती है। खासकर उन लोगों के लिए यह बेहतर विकल्प है जो गंभीर अपराध आधारित कहानियां देखना पसंद करते हैं।