WestBengalElection – चुनाव से पहले लेफ्ट फ्रंट ने युवाओं पर लगाया दांव
WestBengalElection – पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म होता जा रहा है। मतदान में अब लगभग एक महीने का समय बचा है और इसी के साथ सभी प्रमुख दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी मैदान पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इसी कड़ी में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट इस बार युवाओं को केंद्र में रखकर अपनी राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है।

युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर जोर
लेफ्ट फ्रंट को यह एहसास है कि पिछले कुछ चुनावों में युवा मतदाता उससे दूर हो गए थे। इसी कमी को दूर करने के लिए पार्टी ने इस बार युवाओं को सीधे तौर पर जोड़ने की योजना बनाई है। पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य सामिक लाहिरी के मुताबिक, चुनाव में बड़ी संख्या में युवा उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है और स्वयंसेवकों की टीम भी युवाओं से तैयार की गई है। उनका मानना है कि इस बार का चुनाव काफी हद तक युवा वोटर्स की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
रोजगार को बनाया मुख्य चुनावी मुद्दा
पार्टी ने अपने अभियान में रोजगार को सबसे अहम मुद्दा बनाया है। लाहिरी का कहना है कि राज्य में रोजगार की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को बाहर जाना पड़ा है। उनके अनुसार, करीब 1.25 करोड़ लोग नौकरी की तलाश में राज्य छोड़ चुके हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए लेफ्ट फ्रंट एक वैकल्पिक रोजगार नीति तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही घोषणापत्र के जरिए जनता के सामने रखा जाएगा।
उम्मीदवारों की घोषणा और चुनाव प्रचार
चुनावी तैयारी के तहत लेफ्ट फ्रंट ने अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। 294 सदस्यीय विधानसभा में से 224 सीटों के लिए नामों का ऐलान किया जा चुका है। पार्टी के उम्मीदवार जमीनी स्तर पर सक्रिय हो गए हैं और घर-घर जाकर लोगों से संपर्क साध रहे हैं। इसके अलावा, सीपीआई(एमएल)-लिबरेशन और इंडियन सेक्युलर फ्रंट जैसे सहयोगी दल भी इस गठबंधन के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।
छोटी बैठकों और सोशल मीडिया पर फोकस
इस बार लेफ्ट फ्रंट ने बड़े-बड़े रोड शो या विशाल रैलियों के बजाय छोटे स्तर पर लोगों से जुड़ने की रणनीति अपनाई है। मोहल्ला बैठकों, स्थानीय चर्चाओं और व्यक्तिगत संपर्क पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग भी बढ़ाया गया है ताकि युवा पीढ़ी तक सीधे पहुंच बनाई जा सके। पार्टी के कार्यकर्ता अपने स्तर पर प्रचार सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसमें पोस्टर, वीडियो और डिजिटल कंटेंट शामिल हैं।
राज्य के मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना
पार्टी के वरिष्ठ नेता सुझन चक्रवर्ती ने राज्य की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे गंभीर बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। लेफ्ट फ्रंट इन मुद्दों को चुनाव में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।
वोट प्रतिशत में गिरावट और वापसी की कोशिश
पिछले कुछ वर्षों में लेफ्ट फ्रंट का जनाधार काफी कमजोर हुआ है। 2011 के विधानसभा चुनाव में जहां उसे करीब 39 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं 2021 में यह आंकड़ा घटकर 4.73 प्रतिशत रह गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को सीमित सफलता ही मिली। ऐसे में इस बार पार्टी व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय स्तर पर सक्रियता बढ़ाकर अपने पुराने समर्थन आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
चुनाव कार्यक्रम और आगे की राह
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। चुनावी माहौल के बीच सभी दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में हैं, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि लेफ्ट फ्रंट की युवा और रोजगार केंद्रित रणनीति मतदाताओं को कितनी प्रभावित कर पाती है।