उत्तर प्रदेश

PoliticsDebate – महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा में तेज हुई सियासी तकरार

PoliticsDebate – उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अलग-अलग दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क रखे, जिसमें सरकार की नीयत, लागू करने की प्रक्रिया और राजनीतिक इतिहास को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।

सत्र के दौरान जहां एक ओर महिला सशक्तिकरण पर चर्चा की उम्मीद थी, वहीं बहस का केंद्र राजनीतिक आरोपों और पुराने घटनाक्रमों पर भी जाता दिखा।

सपा विधायक ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने सत्र में सरकार के कदमों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह विशेष सत्र बुलाया गया है, उससे यह वास्तविक चर्चा से ज्यादा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नजर आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि महिलाओं को आरक्षण देने की गंभीर इच्छा होती, तो पहले पारित विधेयक को लागू करने में इतना समय नहीं लिया जाता। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने महिलाओं की स्थिति पर कुछ पंक्तियां पढ़ते हुए व्यवस्था पर चिंता जताई।

कांग्रेस ने 2027 चुनाव में आरक्षण लागू करने की मांग की

कांग्रेस की नेता आराधना मिश्रा ने भी महिला आरक्षण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आगामी विधानसभा चुनाव में महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा या नहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम पहले उठाए जा चुके हैं और अब जरूरी है कि पारित कानून को समय पर लागू किया जाए।

इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया में परिसीमन जैसे तकनीकी पहलुओं की भी आवश्यकता होती है। हालांकि, विपक्ष ने इस तर्क से असहमति जताई।

उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष पर साधा निशाना

बहस के दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो दल आज महिला सम्मान की बात कर रहे हैं, उनके पिछले आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए।

उन्होंने पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए विपक्ष की नीयत पर सवाल उठाए और कहा कि महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था और विकास का किया जिक्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रदेश की कानून व्यवस्था और आर्थिक प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेहतर कानून व्यवस्था के कारण महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी बढ़ी है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

उन्होंने विपक्ष से यह भी कहा कि यदि वे महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग करते हैं, तो उन्हें अपने पिछले व्यवहार की भी समीक्षा करनी चाहिए।

सपा नेता ने सरकार पर दोहराव का आरोप लगाया

सपा विधायक संग्राम यादव ने मुख्यमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार नए मुद्दों पर ठोस चर्चा करने के बजाय पुराने बयानों को दोहरा रही है। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र से लोगों को ठोस निर्णय की उम्मीद थी, लेकिन चर्चा अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।

बहस के बीच मुख्य मुद्दे पर टिकी नजर

पूरे सत्र के दौरान महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र में रहा, लेकिन इस पर स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आ सका। राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बरकरार हैं और आगे भी इस विषय पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

विधानसभा की कार्यवाही ने यह जरूर स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण केवल एक नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।

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