GunLicense – यूपी में हथियार लाइसेंस पर हाईकोर्ट ने मांगा पूरा ब्यौरा
GunLicense – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में जारी शस्त्र लाइसेंसों को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत को दिए गए सरकारी हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश में दस लाख से अधिक लोगों के पास हथियार लाइसेंस हैं, जिनमें हजारों ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस जानकारी पर अदालत ने गंभीर चिंता जताई और कई प्रभावशाली व्यक्तियों तथा कथित बाहुबलियों के लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था का रिकॉर्ड तलब किया है।

यह मामला संतकबीर नगर निवासी जय शंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने पहले भी प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और हथियारों के खुले प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। इसी क्रम में सरकार से मंडलवार शस्त्र लाइसेंसों का पूरा ब्योरा मांगा गया था।
प्रदेश में लाखों लाइसेंस, हजारों दागी
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में इस समय 10 लाख से अधिक वैध शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं। इसके अलावा हजारों आवेदन अभी लंबित हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि 6 हजार से अधिक ऐसे लाइसेंसधारी हैं जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
हलफनामे में यह जानकारी भी सामने आई कि प्रदेश के हजारों परिवारों के पास एक से ज्यादा हथियार लाइसेंस हैं। कई मामलों में लाइसेंस निरस्तीकरण और प्रशासनिक आदेशों के खिलाफ अपीलें भी लंबित हैं। इन आंकड़ों पर अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
प्रभावशाली लोगों की जानकारी तलब
हाईकोर्ट ने कई चर्चित और प्रभावशाली व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंसों का रिकॉर्ड भी मांगा है। अदालत ने पूछा है कि किन लोगों को सरकारी सुरक्षा मिली हुई है, उनके पास कितने हथियार हैं और उनकी सुरक्षा में कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि कई बार स्थानीय प्रशासन राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव वाले लोगों की जानकारी पूरी तरह सामने नहीं रखता। इसलिए सभी जिलों से विस्तृत और सत्यापित जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जानकारी प्रस्तुत करते समय जिला पुलिस प्रमुख और पुलिस आयुक्त लिखित रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है। यदि जांच में जानकारी छिपाने की बात सामने आती है तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
अदालत ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। कोर्ट का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हथियार लाइसेंस व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है।
हथियारों के प्रदर्शन पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों के प्रदर्शन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि हथियारों का खुला प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। कोर्ट के अनुसार, आत्मरक्षा के नाम पर हथियार रखना अलग बात है, लेकिन उनका उपयोग दबदबा दिखाने या डर पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए।
अदालत ने टिप्पणी की कि किसी भी शांतिपूर्ण समाज में कानून का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। हथियारों के जरिए प्रभाव स्थापित करने की प्रवृत्ति सामाजिक संतुलन के लिए ठीक नहीं मानी जा सकती।
कई जिलों से मांगी गई जानकारी
कोर्ट ने प्रदेश के अलग-अलग जोन और कमिश्नरेट क्षेत्रों से जुड़े कई चर्चित नामों का रिकॉर्ड भी तलब किया है। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी क्षेत्र के कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। अदालत ने कहा है कि सभी जानकारियां निर्धारित समय के भीतर पेश की जाएं।