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EconomyUpdate – महंगाई के दबाव के बीच बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

EconomyUpdate – महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच आम लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के बाद अब कर्ज की ईएमआई भी महंगी हो सकती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। जून में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक को लेकर बाजार और बैंकिंग सेक्टर की नजरें टिकी हुई हैं।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आर्थिक संस्थानों का मानना है कि इसी दबाव को देखते हुए रिजर्व बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार जून और अगस्त के बीच कुल 50 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी संभव है।

यदि जून की बैठक में दरों में बदलाव नहीं होता है, तो अगस्त में एकमुश्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों की मासिक किस्तें बढ़ सकती हैं। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई के पास ब्याज दर बढ़ाने के अलावा सीमित विकल्प हैं।

वैश्विक परिस्थितियों का भी असर

आर्थिक विश्लेषकों ने बताया कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और एशियाई देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने से भारतीय रिजर्व बैंक पर भी दबाव बढ़ रहा है। कमजोर होते रुपये और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में तेजी ने भी चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक हालात में सुधार नहीं हुआ तो अगले वित्त वर्ष के अंत तक आरबीआई को अतिरिक्त दर वृद्धि पर भी विचार करना पड़ सकता है। इससे बाजार में उधारी की लागत और बढ़ सकती है।

एलआईसी ने दर्ज किया मजबूत मुनाफा

इस बीच सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी एलआईसी ने वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध लाभ करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 23,420 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी की प्रीमियम आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

एलआईसी ने अपने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर 10 रुपये अंतिम लाभांश देने की सिफारिश की है। कंपनी के अनुसार नवीकरण प्रीमियम से आय में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे उसका कुल वित्तीय प्रदर्शन मजबूत हुआ है।

विदेशों में बढ़ा भारतीय कंपनियों का निवेश

भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी बाजारों में निवेश में भी तेज उछाल देखा गया है। अप्रैल महीने में कंपनियों ने करीब 3.4 अरब डॉलर का निवेश किया, जो पिछले महीने की तुलना में लगभग दोगुना है। इस बढ़ोतरी में आईटी और फार्मा कंपनियों की अहम भूमिका रही।

आंकड़ों के मुताबिक कुछ बड़ी कंपनियों ने विदेशी इक्विटी निवेश में प्रमुख हिस्सेदारी निभाई। भू-राजनीतिक तनाव और रुपये में कमजोरी के बावजूद भारतीय कंपनियों का वैश्विक विस्तार जारी है।

आईटीसी और इमामी के नतीजे मिले-जुले

एफएमसीजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी आईटीसी का तिमाही मुनाफा घटा है, हालांकि सिगरेट कारोबार से कंपनी को मजबूत आय मिली है। कंपनी ने शेयरधारकों के लिए अंतिम लाभांश का भी एलान किया है।

वहीं इमामी का शुद्ध लाभ भी पिछले साल की तुलना में कम रहा। कंपनी ने घरेलू बाजार में मजबूती की बात कही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि कमजोर मौसम और वैश्विक तनाव का असर कारोबारी प्रदर्शन पर पड़ाहै।

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