स्वास्थ्य

KidneyStone – पेट दर्द को नजरअंदाज न करें, पथरी की पहचान में मदद करेंगे ये संकेत…

KidneyStone- लगातार या बार-बार होने वाला पेट का दर्द हमेशा गैस या अपच का संकेत नहीं होता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में यह किडनी या गॉलब्लैडर में पथरी बनने का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। ऐसे में बिना जांच के दर्द निवारक दवा लेने से अस्थायी राहत तो मिल सकती है, लेकिन यदि समस्या पथरी की हो तो समय पर इलाज न मिलने से स्थिति जटिल हो सकती है।

किडनी और गॉलब्लैडर की पथरी में क्या अंतर है

विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी स्टोन और गॉलब्लैडर स्टोन दो अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याएं हैं। किडनी स्टोन मूत्र तंत्र से जुड़ा होता है और तब बनता है जब मूत्र में मौजूद खनिज और अन्य तत्व जमा होकर कठोर कण का रूप ले लेते हैं। दूसरी ओर, गॉलब्लैडर स्टोन पित्ताशय में बनता है और यह आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल या पित्त के कुछ तत्वों के जमाव से विकसित होता है। दोनों स्थितियों के कारण और उपचार अलग हो सकते हैं, इसलिए सही पहचान जरूरी है।

दर्द का स्थान बता सकता है समस्या

डॉक्टरों के अनुसार, किडनी स्टोन का दर्द अक्सर कमर या पीठ के एक तरफ से शुरू होकर पेट के निचले हिस्से और कभी-कभी जांघ की ओर फैल सकता है। यह दर्द अचानक तेज हो सकता है और रुक-रुक कर महसूस होता है। कई मरीजों को इसके साथ मतली, उल्टी या पेशाब के दौरान तकलीफ जैसी शिकायत भी हो सकती है।

वहीं गॉलब्लैडर स्टोन का दर्द आमतौर पर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से या दाईं पसलियों के नीचे महसूस होता है। यह दर्द अक्सर तला-भुना या अधिक वसा वाला भोजन करने के बाद शुरू होता है और कुछ घंटों तक बना रह सकता है। यदि पथरी पित्त नली में रुकावट पैदा कर दे तो बुखार, त्वचा या आंखों का पीला पड़ना जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

समय पर जांच क्यों है जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में कई लोगों में पथरी के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन जब पथरी मूत्र मार्ग या पित्त नली में रुकावट पैदा करती है, तब तेज दर्द और अन्य जटिलताएं शुरू हो सकती हैं। इसलिए बार-बार होने वाले पेट या कमर के दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है। अल्ट्रासाउंड और अन्य आवश्यक जांचों के माध्यम से पथरी की सही स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

किन लोगों में बढ़ सकता है जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, अधिक नमक वाला भोजन करना, मोटापा, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी पथरी बनने की संभावना बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले किसी सदस्य को किडनी स्टोन की समस्या रही हो, उनमें भी जोखिम अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है। स्वस्थ आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और नियमित व्यायाम जैसी आदतें इस खतरे को कम करने में मददगार हो सकती हैं।

शरीर के संकेतों को हल्के में न लें

यदि पेट, कमर या पसलियों के आसपास बार-बार तेज दर्द हो, दर्द के साथ उल्टी, पेशाब में परेशानी, बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और उचित उपचार से अधिकांश मामलों में गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।

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