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CrudeOil – पश्चिम एशिया तनाव के बीच कच्चे तेल में तेजी, बाजारों पर दिखा असर

CrudeOil – अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण होने के बाद मंगलवार के शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। वहीं, एशियाई शेयर बाजारों में भी इसका मिला-जुला प्रभाव देखने को मिला। कुछ प्रमुख सूचकांक शुरुआती गिरावट के बाद संभले, जबकि निवेशकों की नजर क्षेत्रीय घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों पर बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज हुई मजबूती

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2.3 प्रतिशत बढ़कर 85.18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग 2.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 80.15 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स में भी इसका असर देखने को मिला। जुलाई डिलीवरी वाले कच्चे तेल के अनुबंध में 282 रुपये की बढ़त के साथ भाव 7,642 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया। अगस्त अनुबंध में भी करीब 240 रुपये की तेजी दर्ज की गई और इसकी कीमत 7,634 रुपये प्रति बैरल रही। कारोबार की अच्छी मात्रा यह संकेत देती है कि निवेशकों की सक्रियता भी बढ़ी है।

भू-राजनीतिक घटनाक्रम बना प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप तथा क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने बाजार की चिंताओं को और गहरा किया है। ऐसे माहौल में तेल परिवहन प्रभावित होने की आशंका से निवेशकों ने कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दिया।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

तेल बाजार में तेजी के साथ एशिया के शेयर बाजारों में भी अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली। जापान का निक्केई सूचकांक शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी और चीन का शंघाई कंपोजिट भी मजबूती के साथ बंद हुए। हांगकांग के हैंग सेंग में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख सूचकांक मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान एसएंडपी 500, नैस्डैक और डाऊ जोन्स पर दबाव देखा गया। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी और चिप कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। महंगे तेल का असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है, जिससे कई देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं। निवेशकों की निगाह अब प्रमुख अमेरिकी बैंकों के तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर भी बनी हुई है, क्योंकि ये कारक आने वाले दिनों में वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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