CustodialDeath – कानपुर में दो गंभीर मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त
CustodialDeath – कानपुर में हाल ही में सामने आए दो गंभीर मामलों ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इन दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है और पुलिस प्रशासन से तय समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। इनमें एक मामला जेल भेजे गए युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का है, जबकि दूसरा मामला एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या से जुड़ा है।

हिरासत के बाद युवक की मौत पर उठे सवाल
पहला मामला जूही थाना क्षेत्र का है, जहां 10 मार्च को पुलिस ने 26 वर्षीय रंजीत को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक, 11 मार्च की शाम अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद जेल प्रशासन ने पहले जेल अस्पताल और फिर उसे उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रंजीत को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और मारपीट की गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ी और अंततः उसकी जान चली गई। परिवार की शिकायत के आधार पर यह मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा, जिसके बाद आयोग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संज्ञान लिया।
आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में कानपुर पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़ी सभी परिस्थितियों, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई का पूरा विवरण निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत किया जाए। आयोग ने 7 मई तक इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
नाबालिग बच्ची के साथ अपराध ने बढ़ाई चिंता
दूसरा मामला बिधनू क्षेत्र का है, जहां 11 मार्च को 11 वर्षीय एक बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। घटना की भयावहता इस बात से समझी जा सकती है कि आरोपियों ने बच्ची के शव को खेत में दफना दिया था। इस मामले ने पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया।
इस संवेदनशील मामले में मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है, जो दर्शाता है कि घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है। आयोग ने पुलिस प्रशासन से यह जानना चाहा है कि अब तक जांच में क्या प्रगति हुई है और आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
पांच सप्ताह में मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट
आयोग ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि इस मामले में पांच सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसमें जांच की स्थिति, आरोपियों की गिरफ्तारी, फोरेंसिक साक्ष्य और पीड़ित परिवार को दी जा रही सहायता जैसी सभी जानकारियां शामिल करने को कहा गया है।
इन दोनों मामलों में आयोग की सक्रियता यह संकेत देती है कि मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रशासन इन निर्देशों का किस तरह पालन करता है और जांच कितनी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ती है।