HealthResearch – साधारण ब्लड टेस्ट से पहले ही मिल सकता है गंभीर बीमारियों का संकेत
HealthResearch – बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। जिन बीमारियों को पहले अधिक उम्र से जोड़कर देखा जाता था, वे अब कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही हैं। हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, हृदय रोग और किडनी से जुड़ी समस्याएं आज आम होती जा रही हैं। डॉक्टरों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन बीमारियों के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट संकेत नजर नहीं आते, जिससे मरीजों को बीमारी का पता काफी देर से चलता है।

इसी बीच ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अध्ययन सामने रखा है, जो भविष्य में बीमारी की पहचान के तरीके को बदल सकता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि एक सामान्य ब्लड टेस्ट की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी व्यक्ति को आने वाले वर्षों में हृदय या किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी का खतरा है या नहीं।
शुरुआती चरण में मिल सकेगा बीमारी का संकेत
शोधकर्ताओं के अनुसार यह परीक्षण शरीर की रक्त वाहिकाओं में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों की पहचान करने में सक्षम हो सकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को होने वाले नुकसान से जुड़ी होती है। यह क्षति धीरे-धीरे बढ़ती है और लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के बनी रह सकती है।
अध्ययन में पाया गया कि लाल रक्त कोशिकाओं यानी रेड ब्लड सेल्स की सतह पर होने वाले बायोकैमिकल बदलावों का विश्लेषण करके शरीर के भीतर हो रहे नुकसान के संकेत प्राप्त किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से डॉक्टरों को बीमारी गंभीर होने से पहले ही उसके जोखिम का अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है।
रक्त वाहिकाओं की पतली परत पर वैज्ञानिकों का फोकस
वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में रक्त वाहिकाओं के भीतर मौजूद एक बेहद पतली सुरक्षात्मक परत पर खास ध्यान दिया है, जिसे ग्लाइकोकैलिक्स कहा जाता है। यह परत शरीर में खून के प्रवाह और कोशिकाओं के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक जब यह परत क्षतिग्रस्त होने लगती है, तब हृदय और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। पहले इस तरह की क्षति का पता लगाने के लिए जटिल जांच प्रक्रियाओं और अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने ब्लड टेस्ट के जरिए इसे समझने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
भविष्य में इलाज को बेहतर बनाने में मिल सकती है मदद
शोध से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक केवल बीमारी का जोखिम बताने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी पता लगाने में मदद कर सकती है कि किसी मरीज पर दवाओं का असर कितना हो रहा है। यदि रक्त वाहिकाओं की स्थिति में सुधार दिखाई देता है, तो डॉक्टर इलाज की दिशा को अधिक प्रभावी तरीके से तय कर पाएंगे।
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मैथ्यू बटलर ने कहा कि शरीर की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को सीधे देख पाना आसान नहीं होता। ऐसे में रेड ब्लड सेल्स में होने वाले बदलावों के जरिए शरीर के भीतर की स्थिति को समझना चिकित्सा विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों ने बताई बड़ी उपलब्धि
नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में प्रकाशित इस शोध को विशेषज्ञ भविष्य की स्वास्थ्य जांच प्रणाली के लिए अहम मान रहे हैं। प्रोफेसर साइमन सैचेल के अनुसार हृदय और किडनी का स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़ा होता है। यदि शुरुआती स्तर पर रक्त वाहिकाओं की क्षति का पता चल जाए, तो गंभीर बीमारियों को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह की जांच तकनीकें लाखों लोगों को गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाने में मददगार साबित हो सकती हैं। हालांकि फिलहाल यह परीक्षण शोध स्तर पर है और इसके व्यापक उपयोग से पहले आगे और अध्ययन किए जाएंगे।