ChineseManja – लखनऊ में फिर हादसा, दो लोग खतरनाक मांझे से घायल
ChineseManja – राजधानी लखनऊ में प्रतिबंधित चीनी मांझे का खतरा एक बार फिर सामने आया है। बृहस्पतिवार को अलग-अलग इलाकों में हुए दो हादसों में एक बिजली विभाग का कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। गनीमत रही कि दोनों की जान बच गई, लेकिन इन घटनाओं ने शहर में बेखौफ बिक रहे घातक मांझे और उससे पैदा हो रहे जोखिमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि तमाम प्रतिबंधों के बावजूद यह जानलेवा मांझा खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है और रोजमर्रा की आवाजाही को खतरनाक बना रहा है।

गोमती नगर विस्तार में बिजली कर्मी के साथ हादसा
पहली घटना शाम करीब पांच बजे गोमती नगर विस्तार क्षेत्र में हुई, जब बिजली विभाग के कर्मचारी सुधीर अपने कार्यस्थल की ओर जा रहे थे। सड़क पर फैले चीनी मांझे में उलझकर वह बुरी तरह घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक मांझा उनके गले के पास आ गया, लेकिन संयोग से वह गहरी चोट से बच गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद की और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस घटना के बाद क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया, क्योंकि कई अन्य राहगीरों ने भी खुले पड़े मांझे की शिकायत की।
शहीद पथ पर सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी की गंभीर चोट
दूसरा और अधिक गंभीर हादसा दोपहर करीब दो बजे शहीद पथ के पास हुआ। अर्जुनगंज के सरजू नगर कॉलोनी निवासी बृजेश राय, जो कुछ साल पहले सेना से सेवानिवृत्त हुए थे और वर्तमान में कैंसर अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं, स्कूटी से गोमतीनगर स्थित एक अधिकारी के घर जा रहे थे। हेलमेट पहने होने के बावजूद वह सड़क पर लटके चीनी मांझे की चपेट में आ गए। तेज धार वाले मांझे से उनका दाहिना गाल और होंठ बुरी तरह कट गया। घायल अवस्था में उन्होंने किसी तरह स्कूटी रोकी और सड़क किनारे बैठ गए, जहां राहगीरों ने उनकी मदद की।
इलाज और मौजूदा स्थिति
स्थानीय लोगों ने तुरंत बृजेश राय को नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों को उनके चेहरे पर 12 टांके लगाने पड़े। प्राथमिक उपचार के बाद परिवार वाले उन्हें बेहतर देखभाल के लिए कमांड अस्पताल ले गए। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने की वजह से उनकी हालत अब स्थिर है, लेकिन इस घटना ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके परिजनों का कहना है कि अगर मांझा थोड़ा और ऊपर होता तो परिणाम कहीं ज्यादा भयावह हो सकते थे।
शहर में बढ़ता खतरा और प्रशासनिक चुनौती
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर चीनी मांझे के खुले इस्तेमाल और अवैध बिक्री के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। हाल के महीनों में लखनऊ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों—मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और मेरठ—से ऐसे ही हादसों की खबरें आती रही हैं, जहां लोगों की गर्दन, चेहरा और हाथ गंभीर रूप से कट चुके हैं। कई मामलों में तो यह मांझा जानलेवा भी साबित हुआ है।
स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि त्योहारों और पतंगबाजी के मौसम में यह समस्या और विकराल हो जाती है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई अक्सर कागजों तक सीमित रह जाती है। दुकानदार चोरी-छिपे इसे बेचते रहते हैं, जबकि आम लोग रोजमर्रा के कामकाज के दौरान असुरक्षित महसूस करते हैं। यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि खुले तारों की तरह सड़क पर फैला मांझा दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सख्त निगरानी, जनजागरूकता अभियान और जिम्मेदार पतंगबाजी को बढ़ावा देने की जरूरत है। कई लोग पारंपरिक सूती मांझे के इस्तेमाल की मांग कर रहे हैं, ताकि मनोरंजन के साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
इन ताजा घटनाओं के बाद स्थानीय पुलिस और नगर निगम अधिकारियों ने जांच शुरू करने की बात कही है, लेकिन शहरवासी अब ठोस और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि आने वाले दिनों में ऐसे हादसों को रोका जा सके।