उत्तर प्रदेश

AyurvedaRecruitment – 16 साल पुरानी नियुक्तियों में अब हुआ गड़बड़ी का खुलासा

AyurvedaRecruitment – राज्य के आयुर्वेद विभाग में चिकित्साधिकारियों की नियुक्ति को लेकर एक पुराना मामला सामने आया है, जिसने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, लोक सेवा आयोग से चयनित कुछ चिकित्सकों को उनके मूल पद के बजाय दूसरे विभाग में नियुक्त कर दिया गया। ये चिकित्सक पिछले करीब 16 वर्षों से उसी पद पर कार्यरत हैं, जिससे अब पूरे मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।

चयन और नियुक्ति में अंतर से पैदा हुआ विवाद

मामला वर्ष 2003 में निकली भर्तियों से जुड़ा है, जब आयुर्वेद और आयुर्वेदिक-यूनानी चिकित्साधिकारी पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2008 में परिणाम घोषित हुआ और 2009 में नियुक्तियां दी गईं। बताया जा रहा है कि आयुर्वेदिक-यूनानी चिकित्साधिकारी का कैडर सामुदायिक स्वास्थ्य चिकित्साधिकारी के अंतर्गत आता है, जिनकी तैनाती स्वास्थ्य विभाग के अधीन होती है।

गलत विभाग में तैनाती का आरोप

आरोप है कि चयनित पांच चिकित्सकों को, जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्त किया जाना था, उन्हें आयुर्वेद विभाग में पदस्थ कर दिया गया। इस प्रक्रिया में न केवल पदों का बदलाव हुआ, बल्कि उनकी सेवा शर्तों और कार्यक्षेत्र में भी अंतर आ गया। यही विसंगति बाद में विवाद का कारण बनी।

एसीपी लाभ को लेकर खुला मामला

इस पूरे प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब दो चिकित्सकों को सुनिश्चित करियर प्रगति योजना का लाभ नहीं मिला, जबकि अन्य तीन को यह सुविधा दे दी गई थी। इससे असमानता का मुद्दा उठा और प्रभावित चिकित्सकों ने इस संबंध में आवेदन किया। इसके बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं और नियुक्ति प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी सामने आई।

वरिष्ठता सूची में भी दिखी असंगति

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन चिकित्सकों के नाम आयुर्वेद विभाग की अंतिम वरिष्ठता सूची में शामिल नहीं हैं, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य कैडर की सूची में उनका नाम मौजूद है। इस दोहरे रिकॉर्ड ने प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है और प्रक्रिया की गंभीरता को उजागर किया है।

निदेशालय ने शासन से मांगी स्पष्टता

आयुर्वेद निदेशालय ने इस मामले को लेकर शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। पत्र में संबंधित चिकित्सकों के नाम और उनकी नियुक्ति से जुड़े तथ्यों का उल्लेख करते हुए स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। विभाग ने यह भी बताया कि चयन और नियुक्ति में अंतर होने के कारण अब आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश जरूरी हैं।

जांच के संकेत, फैसले का इंतजार

प्रमुख सचिव आयुष ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि यह एक पुराना प्रकरण है और इसकी जांच कराई जाएगी। वहीं आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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