AgricultureGrowth – यूपी में कृषि विकास दर बढ़कर 18 फीसदी पहुंची
AgricultureGrowth – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य ने बीते कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर नीतियों और प्रयासों के चलते कृषि विकास दर में बड़ा सुधार हुआ है। लखनऊ में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की कृषि क्षमता और उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया।

राज्य की कृषि क्षमता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ कृषि के लिहाज से भी बेहद समृद्ध है। यहां की भूमि उर्वर है और जल संसाधन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि देश की कुल आबादी का लगभग 16 से 17 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में निवास करता है। इसके बावजूद राज्य के पास केवल 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि है, लेकिन इसी भूमि से देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होता है। इसे उन्होंने राज्य के किसानों की मेहनत और दक्षता का प्रमाण बताया।
कृषि विकास दर में हुआ उल्लेखनीय सुधार
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए कई योजनाएं लागू की हैं। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि कृषि विकास दर, जो पहले करीब 8 प्रतिशत थी, अब बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने इसे किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार के संयुक्त प्रयासों का नतीजा बताया और कहा कि थोड़े से संगठित प्रयास से बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
कृषि और इतिहास के संदर्भ का उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने भारतीय कृषि की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित था। उन्होंने साहित्यिक कृति ‘आनंदमठ’ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में किसानों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, यह इतिहास में दर्ज है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा और उन्हें कर्ज के बोझ तले दबा दिया गया।
किसान की बहुआयामी भूमिका पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का किसान केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह एक कारीगर और उद्यमी के रूप में भी अपनी पहचान बनाता रहा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से किसान खेती के साथ-साथ अन्य उत्पादन कार्यों में भी सक्रिय रहते थे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती थी। इस तरह किसान न केवल अन्न उत्पादन करता था, बल्कि स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार भी सृजित करता था।
कृषि को उद्यम से जोड़ने की जरूरत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब किसान अपने उत्पादों को मूल्यवर्धन के साथ बाजार तक पहुंचाता है, तो उसकी आय में वृद्धि होती है और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
कृषि क्षेत्र में नवाचार और सहयोग की भूमिका
कार्यक्रम में मौजूद वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और शोध का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वैज्ञानिकों के सहयोग से किसानों को आधुनिक तकनीकों का लाभ मिलेगा और उत्पादन क्षमता में और सुधार होगा। साथ ही, उन्होंने कृषि को भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए सभी संबंधित पक्षों से मिलकर काम करने का आह्वान किया।