AgricultureGrowth – शिवराज सिंह चौहान ने यूपी को कृषि में अग्रणी बताया
AgricultureGrowth – लखनऊ में आयोजित उत्तरी क्षेत्र के कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश की कृषि प्रगति को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। चौहान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश आज खाद्यान्न उत्पादन के मामले में देश में अग्रणी बन चुका है और यह बदलाव योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और किसानों की भागीदारी से संभव हुआ है।

जलवायु के अनुसार रणनीति बनाने पर जोर
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने देश की विविध जलवायु परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि हर क्षेत्र की जरूरतें अलग होती हैं। ऐसे में कृषि योजनाओं और तकनीकों को उसी के अनुसार तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी परिस्थितियों के हिसाब से रणनीति बनानी चाहिए, ताकि उत्पादन और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। यह दृष्टिकोण लंबे समय में कृषि क्षेत्र को अधिक स्थिर और प्रभावी बना सकता है।
खाद्यान्न उत्पादन और नई चुनौतियां
चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में शीर्ष पर जरूर है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाए रखना जरूरी है। साथ ही उन्होंने तीन अहम लक्ष्यों—खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और पोषण—पर समान रूप से काम करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी ठोस व्यवस्था होनी चाहिए।
कृषि में विविधीकरण की आवश्यकता
केंद्रीय मंत्री ने खेती में विविधता लाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है। मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पादन बढ़ाने के लिए फसल चक्र और नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अत्यधिक रासायनिक उपयोग से मिट्टी की सेहत प्रभावित हुई है, जिससे सबक लेने की जरूरत है।
बीज और तकनीक की अहम भूमिका
चौहान ने बेहतर उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु के अनुकूल बीजों का चयन भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा। उनके अनुसार, वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित नई किस्मों का लाभ किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते मौसम के पैटर्न को देखते हुए कृषि क्षेत्र को पहले से तैयार रहना होगा।
नकली उत्पादों पर सख्ती की जरूरत
कृषि मंत्री ने नकली खाद और कीटनाशकों के खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए कानून बनाए जा रहे हैं और राज्यों को इस दिशा में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे उत्पाद न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि फसल उत्पादन पर भी नकारात्मक असर डालते हैं।
कृषि रोडमैप और वैज्ञानिकों की भूमिका
उन्होंने सुझाव दिया कि हर राज्य को अपना स्पष्ट कृषि रोडमैप तैयार करना चाहिए। देश में मौजूद हजारों कृषि वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता का सही उपयोग करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को खेतों तक पहुंचकर किसानों की समस्याएं समझनी चाहिए। इससे शोध और व्यवहारिक खेती के बीच की दूरी कम होगी और किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
सरकारी योजनाओं के विस्तार पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि किसानों के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य उनकी आय और सुविधा बढ़ाना है। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड और किसान पंजीकरण जैसी पहलों को तेज करने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को कई प्रकार के लाभ मिल सकते हैं और कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है।