2029 लोकसभा चुनाव की आहट: अयोध्या से संकेतों के केंद्र में बृज भूषण सिंह
पूर्व भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी संभावित भूमिका पर संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने को लेकर कोई भी अंतिम निर्णय समय आने पर लिया जाएगा। यह टिप्पणी उन्होंने फैजाबाद (अयोध्या) में एक निजी कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में की। उनके इस बयान को आगामी चुनावी रणनीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर तब जब अयोध्या सीट पर 2024 में राजनीतिक समीकरण बदले थे।
फैजाबाद से चुनाव की संभावना पर खुला बयान
सोमवार को सिविल लाइंस एलआईसी चौराहे पर एक गारमेंट शोरूम के उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बृज भूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि 2029 को लेकर वे सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी फैसले से पहले परिस्थितियों और पार्टी की स्थिति का आकलन किया जाएगा। उनके शब्दों में, चुनावी निर्णय जल्दबाजी में नहीं, बल्कि उचित समय पर सोच-समझकर लिए जाने चाहिए।

विनय कटियार के दावे पर समर्थन
बृज भूषण सिंह ने फैजाबाद लोकसभा सीट को लेकर पूर्व सांसद विनय कटियार के दावे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि टिकट की मांग करना किसी भी वरिष्ठ नेता का अधिकार है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। सिंह के मुताबिक, विनय कटियार लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति से जुड़े रहे हैं और यदि वे पार्टी से अवसर मांगते हैं तो यह स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे दावों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानना चाहिए।
2024 के नतीजों से बदला राजनीतिक परिदृश्य
फैजाबाद सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने भाजपा उम्मीदवार लल्लू सिंह को 54 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। इस नतीजे ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया, बल्कि भाजपा के भीतर भी मंथन को तेज कर दिया। 2029 की तैयारियों को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
शक्ति प्रदर्शन और भविष्य की तैयारी
हाल ही में अपने जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में बृज भूषण सिंह ने जिस तरह का जनसमर्थन दिखाया, उसे राजनीतिक हलकों में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। उस मंच से उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके वक्तव्यों और गतिविधियों से यह संदेश जरूर गया कि वे भविष्य की रणनीति पर काम कर रहे हैं। समर्थकों की मौजूदगी ने भी उनके प्रभाव का संकेत दिया।
पिता-पुत्र की जोड़ी पर चर्चा
बृज भूषण सिंह के बेटे और कैसरगंज से मौजूदा भाजपा सांसद करण भूषण सिंह पहले ही सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि 2029 में पिता-पुत्र दोनों चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला। हालांकि, बृज भूषण सिंह ने इस विषय पर फिलहाल कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।
डब्ल्यूएफआई विवाद और कानूनी स्थिति
कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष रहे बृज भूषण सिंह को 2024 के आम चुनाव से पहले भाजपा का टिकट नहीं मिला था। यह फैसला महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद लिया गया था। इस मामले में देश के कई शीर्ष पहलवानों ने जंतर-मंतर पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में दिल्ली की एक अदालत ने नाबालिग पहलवान से जुड़े मामले में सिंह के खिलाफ दाखिल आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी। कानूनी रूप से मामला समाप्त होने के बाद भी इसका राजनीतिक असर लंबे समय तक महसूस किया गया।
जनसमर्थन को बताया सबसे बड़ी ताकत
सोमवार को बृज भूषण सिंह ने युवाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से मिले समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उनके अनुसार, राजनीति में टिके रहने के लिए जनसमर्थन सबसे अहम होता है और वही आगे की दिशा तय करता है।



