राष्ट्रीय

PoliticsUpdate – बच्चू कडू का शिवसेना में जाने का ऐलान, लड़ेंगे एमएलसी चुनाव

PoliticsUpdate – महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम मोड़ सामने आया है, जहां पूर्व मंत्री और प्रहार जनशक्ति पक्ष के नेता बच्चू कडू ने सत्तारूढ़ शिवसेना के साथ जुड़ने का फैसला किया है। गुरुवार को उन्होंने साफ किया कि वह विधान परिषद चुनाव में शिवसेना के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे। राज्य में परिषद की नौ सीटों के लिए 12 मई को मतदान होना है, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा गुरुवार दोपहर 3 बजे तय की गई है।

इस घटनाक्रम को आगामी चुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई वरिष्ठ सदस्य, जिनमें उद्धव ठाकरे भी शामिल हैं, 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

शिंदे से मुलाकात के बाद लिया फैसला

बच्चू कडू ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले देर रात उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे से मुलाकात की थी। इस बातचीत में उन्होंने किसानों, खेतिहर मजदूरों और दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

कडू के मुताबिक, शिंदे ने इन मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाया और सहयोग का भरोसा दिया। इसी के बाद उन्होंने शिवसेना में शामिल होने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा से सामाजिक और ग्रामीण वर्ग के हित रहे हैं, और अगर उन्हें इन मुद्दों पर काम करने का बेहतर मंच मिलता है, तो वह उसके साथ खड़े रहेंगे।

चुनावी रणनीति और नामांकन की तैयारी

कडू ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिवसेना के टिकट पर एमएलसी चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। राज्य की नौ सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है।

सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से भारतीय जनता पार्टी ने पांच उम्मीदवारों को पहले ही मैदान में उतार दिया है। इसके अलावा, एक सीट पर उपचुनाव भी होना है, जिसके लिए अलग से उम्मीदवार घोषित किया गया है। इस बीच, कडू की एंट्री को गठबंधन के लिए एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक सफर और वापसी की पृष्ठभूमि

बच्चू कडू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत शिवसेना से ही की थी, लेकिन 1999 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और बाद में प्रहार जनशक्ति पक्ष का गठन किया। विदर्भ क्षेत्र में उनका प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है, खासकर किसानों और सामाजिक मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता के कारण।

उन्होंने कहा कि उनकी यह वापसी नई शुरुआत नहीं, बल्कि पुराने संबंधों का पुनर्स्थापन है। उनके शब्दों में, वह पार्टी के लिए नए नहीं हैं, बल्कि एक अंतराल के बाद फिर से उसी मंच पर लौट रहे हैं जहां से उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।

सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी भूमिका पर जोर

कडू ने हाल के वर्षों में किसानों के कर्ज राहत और दिव्यांगों के लिए आर्थिक सहायता जैसे मुद्दों को लेकर अपनी सक्रिय भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भले ही वह 2024 का चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन उनकी कोशिशों के चलते राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार किया।

उनका मानना है कि राजनीति केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की आवाज उठाना भी उतना ही जरूरी है। यही वजह है कि उन्होंने अपने फैसले को व्यक्तिगत लाभ से ज्यादा सामाजिक सरोकारों से जोड़कर देखा है।

विपक्ष की स्थिति और संभावनाएं

विधान परिषद की इन सीटों को लेकर विपक्षी महा विकास अघाड़ी की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विपक्ष के पास इन सीटों में से सीमित संख्या में ही जीत की संभावना है।

शिवसेना (यूबीटी) की ओर से आदित्य ठाकरे ने पहले ही अंबदास दानवे को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। ऐसे में आगामी चुनाव मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है, जहां सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी ताकत आजमाएंगे।

राज्य की राजनीति में यह बदलाव आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.