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Political Turmoil: राहुल गांधी से हो रहा है मोहभंग, क्या कहर ढाएगा विदेशी धरती पर भारत का अपमान…

Political Turmoil: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया जर्मनी दौरे ने भारतीय राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। बर्लिन के हर्टि स्कूल (Hertie School) में दिए उनके बयानों को लेकर भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के उन दावों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने हरियाणा चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया था। पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी विदेशी धरती पर जाकर देश के लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करने का काम कर रहे हैं, जो बेहद निंदनीय है।

Political Turmoil
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200 बार वोट डालने के दावे पर तीखे सवाल

राहुल गांधी ने जर्मनी में दावा किया कि हरियाणा चुनाव के दौरान एक महिला ने 200 बार वोट डाले। भाजपा ने इस दावे को पूरी तरह मनगढ़ंत और हास्यास्पद करार दिया है। पूनावाला ने (Election Integrity) पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे उस महिला का नाम, पता और ठोस सबूत सार्वजनिक करें। उन्होंने पूछा कि आधुनिक सुरक्षा और ईवीएम के दौर में कोई एक व्यक्ति 200 बार वोट कैसे डाल सकता है? भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी ने ‘वोटर लिस्ट’ में नाम होने और ‘वोट डालने’ के बीच के अंतर को जानबूझकर धुंधला किया ताकि सनसनी फैलाई जा सके।


शकुन रानी का जिक्र और लोकतंत्र पर प्रहार (Political Turmoil)

राहुल गांधी ने अपने भाषण में शकुन रानी नामक एक महिला का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने दो बार मतदान किया। इस पर भाजपा ने कहा कि बिना किसी न्यायिक या आधिकारिक पुख्ता सबूत के ऐसे व्यक्तिगत आरोप लगाना (Democratic Values) के खिलाफ है। भाजपा प्रवक्ताओं का मानना है कि राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं, वे भारत की संस्थाओं और चुनाव आयोग पर कीचड़ उछालते हैं। इस तरह के बयान न केवल वैश्विक पटल पर भारत की छवि खराब करते हैं बल्कि देश के करोड़ों मतदाताओं के विवेक का भी अपमान करते हैं।


इमरान मसूद की बगावत: ‘राहुल हटाओ, प्रियंका लाओ’

कांग्रेस के भीतर भी अब राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर असंतोष के सुर मुखर होने लगे हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के हालिया बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। मसूद ने कहा कि यदि प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री होतीं, तो वे बांग्लादेश जैसे मुद्दों पर अपनी दादी इंदिरा गांधी की तरह कड़ा जवाब देतीं। भाजपा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि अब कांग्रेस के अपने नेता ही (Leadership Crisis) को स्वीकार कर रहे हैं। पूनावाला ने दावा किया कि इमरान मसूद का सीधा संदेश है—’राहुल गांधी को हटाओ और प्रियंका गांधी को नेतृत्व सौंपो।’


पार्टी के अंदर बढ़ता अविश्वास और जनपथ का मौन

भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी न केवल जनता का भरोसा खो चुके हैं, बल्कि अब उनके अपने सहयोगी भी उनके साथ खड़े होने में हिचकिचा रहे हैं। पूनावाला के अनुसार, इमरान मसूद के इस रुख का समर्थन रॉबर्ट वाड्रा ने भी किया है, जिसका अर्थ है कि अब (Internal Turmoil) गांधी परिवार के आंगन तक पहुँच चुका है। भाजपा का तर्क है कि राहुल गांधी के पास न तो ‘जनमत’ है, न ‘संगत’ (सहयोगियों का साथ) और अब तो उनके पास ‘जनपथ’ (पार्टी मुख्यालय) का भी पूर्ण समर्थन नहीं रह गया है।


मोहम्मद मोकिम का निलंबन और दबाई जाती आवाजें

कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग करने वालों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को भी भाजपा ने मुद्दा बनाया है। ओडिशा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद मोकिम का उदाहरण देते हुए पूनावाला ने कहा कि जब मोकिम ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को नेतृत्व से हटाकर (Priyanka Gandhi Support) की बात कही थी, तो उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में लोकतंत्र की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जब कोई सच बोलता है या राहुल गांधी की क्षमता पर सवाल उठाता है, तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।


क्या प्रियंका गांधी बनेंगी कांग्रेस का नया चेहरा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह से कांग्रेस के भीतर से प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग उठ रही है, वह राहुल गांधी के लिए एक बड़ी चुनौती है। इमरान मसूद द्वारा प्रियंका की तुलना (Indira Gandhi Parallel) से करना यह दर्शाता है कि कार्यकर्ता अब एक आक्रामक नेतृत्व की तलाश में हैं। दूसरी ओर, भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाते हुए यह संदेश दे रही है कि कांग्रेस एक दिशाहीन पार्टी बन चुकी है जहाँ भाई-बहन के समर्थकों के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है।


निष्कर्ष: कूटनीति बनाम राजनीति

अंततः, राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर दिए गए बयान और पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व पर उठते सवाल कांग्रेस के लिए एक दोहरी मुसीबत बन गए हैं। एक तरफ उन्हें (National Integrity) के मुद्दे पर भाजपा के कड़े सवालों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रियंका गांधी के बढ़ते कद और समर्थकों की मांग ने उनकी स्थिति को असहज कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस आंतरिक कलह और बाहरी हमलों का सामना किस रणनीति के साथ करती है।

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