Narmada – चार राज्यों के बीच नर्मदा विस्थापन विवाद पर बनी सहमति
Narmada- नर्मदा नदी परियोजना से जुड़े विस्थापन और भूमि मुआवजे के लंबे समय से लंबित मुद्दे के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति बनी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र ने इस विवाद को आपसी सहमति से समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से वर्षों से लंबित पुनर्वास और मुआवजा संबंधी मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

गृह मंत्री ने समझौते को बताया महत्वपूर्ण कदम
समझौते के बाद अमित शाह ने कहा कि नर्मदा परियोजना के कारण प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और भूमि मुआवजे को लेकर कई दशकों से विवाद बना हुआ था। उन्होंने कहा कि चारों राज्यों ने आपसी संवाद के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाला है, जो सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करता है। उनके अनुसार, इस परियोजना का सबसे अधिक लाभ मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को मिला है, जहां सिंचाई, पेयजल और बिजली की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
राजस्थान में भी दिखा परियोजना का प्रभाव
गृह मंत्री ने कहा कि भले ही राजस्थान को मिलने वाला जल हिस्सा अन्य राज्यों की तुलना में सीमित दिखाई देता हो, लेकिन जिन क्षेत्रों तक नर्मदा का पानी पहुंचा है वहां कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाएं बढ़ने से खेती की उत्पादकता में सुधार हुआ है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। उनके अनुसार, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से संबंधित परियोजनाएं कई क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
जल प्रबंधन में सहयोग की नीति पर जोर
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा और राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के बीच संवाद बढ़ने से लंबे समय से लंबित कई मुद्दों का समाधान संभव हुआ है। उनके अनुसार, आपसी सहयोग की नीति के कारण जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और साझा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
अन्य जल समझौतों का भी किया उल्लेख
गृह मंत्री ने हाल के महीनों में राज्यों के बीच हुए अन्य जल समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 29 जून को राजस्थान और हरियाणा ने यमुना जल परियोजना से जुड़े लगभग तीन दशक पुराने विवाद को समाप्त करते हुए निर्माण और क्रियान्वयन पर सहमति बनाई थी। इसके अलावा 16 जून को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर सहमति दी थी। सरकार का मानना है कि ऐसे समझौते राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।