Judiciary – वांगचुक ने बताया क्यों नहीं रखी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की शर्त…
Judiciary – नीट पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली में शुरू हुआ आंदोलन समय के साथ राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया। 6 जून से जारी प्रदर्शन को उस समय नई गति मिली, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की। उन्होंने शुरुआत में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग उठाई थी। बाद में जब उन्होंने 26 दिनों के अनशन के बाद इसे समाप्त करने का फैसला लिया, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि सरकार के सामने रखी गई अंतिम शर्तों में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा क्यों शामिल नहीं था।

अनशन समाप्त होने के बाद उठे सवाल
भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद कई छात्र संगठनों और प्रदर्शन में शामिल लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या आंदोलन अपने शुरुआती उद्देश्य से पीछे हट गया है। सरकार की ओर से कुछ मांगों पर सहमति बनने के बाद वांगचुक ने अनशन खत्म किया, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का उल्लेख अंतिम सहमति का हिस्सा नहीं था। इसी वजह से आंदोलन की दिशा और रणनीति को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
वीडियो संदेश में दी अपनी सफाई
इन सवालों के बीच सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई निश्चित आश्वासन नहीं दिया जा रहा था। उनके सामने दो ही विकल्प थे—या तो अनिश्चित समय तक अनशन जारी रखें या फिर आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अपने स्वास्थ्य और जीवन को प्राथमिकता दें। वांगचुक के अनुसार, पिछले कई दिनों से देशभर के लोग उनसे लगातार अपील कर रहे थे कि वे अपनी जान जोखिम में न डालें, क्योंकि लंबी लड़ाई के लिए उनका स्वस्थ रहना अधिक आवश्यक है।
आंदोलन की उपलब्धियों पर जताया भरोसा
वांगचुक ने अपने संदेश में यह भी कहा कि वे इस आंदोलन को असफल नहीं मानते। उनका कहना था कि यदि भविष्य में भी जवाबदेही तय नहीं होती या इस्तीफे जैसा फैसला नहीं लिया जाता, तो इससे नुकसान आंदोलन का नहीं बल्कि सरकार की छवि का होगा। उन्होंने संकेत दिया कि सार्वजनिक जवाबदेही का प्रश्न अभी भी बना हुआ है और समय के साथ इस पर राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक स्तर पर चर्चा जारी रहेगी।
बच्चों के भविष्य को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता
सामाजिक कार्यकर्ता ने स्पष्ट किया कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा छात्रों और युवाओं का भविष्य था। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज न हों, यह उनकी प्रमुख चिंता थी। वांगचुक ने बताया कि उन्हें इस संबंध में आश्वासन मिला है, जिससे भविष्य में छात्रों के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका कम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और पूरे मामले पर संसद में चर्चा कराने का भरोसा भी सरकार की ओर से दिया गया है।
आंदोलन पर सीजेपी का रुख बरकरार
हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। पार्टी का कहना है कि जब तक इस मांग पर निर्णय नहीं होता, तब तक उसका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में नीट पेपर लीक से जुड़ा यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बना रह सकता है।