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RAF – संसद मार्च के बाद चर्चा में आई नीली वर्दी वाली फोर्स, जानिए इसकी भूमिका

RAF – दिल्ली में हाल ही में हुए ‘संसद मार्च’ के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान नीली वर्दी पहने सुरक्षाकर्मी चर्चा का विषय बन गए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी दिखाई दिए। इसके बाद लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ी कि यह विशेष बल क्या है, इसकी जिम्मेदारियां क्या हैं और विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसकी तैनाती किन परिस्थितियों में की जाती है।

सीआरपीएफ की विशेष इकाई है आरएएफ

रैपिड एक्शन फोर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक विशेष इकाई है, जिसका गठन वर्ष 1992 में दंगा नियंत्रण और संवेदनशील परिस्थितियों से त्वरित तरीके से निपटने के उद्देश्य से किया गया था। यह बल सांप्रदायिक तनाव, हिंसक प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आपात स्थितियों में तेजी से कार्रवाई के लिए जाना जाता है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसका संचालन वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में किया जाता है।

भीड़ नियंत्रण और राहत कार्य भी जिम्मेदारी

आरएएफ का मुख्य कार्य केवल भीड़ को नियंत्रित करना ही नहीं है, बल्कि संवेदनशील इलाकों में शांति बनाए रखना, फ्लैग मार्च करना, चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालना और प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग देना भी है। इस बल के जवानों को दंगा नियंत्रण, मानवाधिकार, भीड़ के व्यवहार और न्यूनतम बल प्रयोग जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसकी पहचान नीले रंग की वर्दी है, जिससे भीड़ के बीच इसकी अलग पहचान बनी रहती है।

संसद मार्च के बाद क्यों बढ़ी चर्चा

हालिया प्रदर्शन के दौरान सोशल Media पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें आरएएफ के जवानों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करते देखा गया। कुछ वीडियो में सुरक्षा बलों के जवान घायल भी नजर आए। इसी दौरान एक सहायक कमांडेंट से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा का विषय बनी। कुछ संगठनों ने उस पोस्ट पर आपत्ति जताई, हालांकि संबंधित सामग्री की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। इसके अलावा, कनॉट प्लेस क्षेत्र में एक आरएएफ जवान के साथ कथित मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया।

बिना वर्दी और नेम टैग को लेकर उठे सवाल

प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी साझा किए गए, जिनमें कुछ लोग सादे कपड़ों में हाथ में लाठी लिए दिखाई दिए। वहीं, कुछ वर्दीधारी कर्मियों की वर्दी पर नेम टैग स्पष्ट रूप से नजर नहीं आया। इन तस्वीरों और वीडियो के आधार पर कुछ प्रदर्शनकारियों और संगठनों ने सवाल उठाए कि क्या कार्रवाई के दौरान पहचान छिपाई गई थी। इन आरोपों के बीच दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने 22 जुलाई को निर्देश जारी किया कि प्रदर्शन स्थलों पर तैनात सभी पुलिसकर्मी वर्दी में ही ड्यूटी करेंगे।

नियमों और पुलिस के पक्ष पर क्या जानकारी

कानूनी जानकारों के अनुसार, मौजूदा कानूनों में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, जो हर स्थिति में पुलिसकर्मियों के लिए नेम टैग प्रदर्शित करना अनिवार्य बताती हो। हालांकि, सामान्य ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनना पुलिस व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, जबकि खुफिया अभियान या विशेष परिस्थितियों में सादे कपड़ों में काम करने की अनुमति दी जा सकती है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों पर पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

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