Judiciary – सीजेआई सूर्य कांत ने मीडिया रिपोर्टिंग पर जताई आपत्ति, कहा- मामला अदालत में दायर ही नहीं था…
Judiciary – भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने उस खबर पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें यह दावा किया गया था कि उन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए उसे सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति मीडिया में सामने आई रिपोर्टों से बिल्कुल अलग थी और अदालत के समक्ष उस समय कोई विधिवत याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी।

मीडिया रिपोर्टिंग पर सीजेआई की स्पष्ट टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने केवल एक प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) का उल्लेख किया था। इसके बावजूद कुछ मीडिया संस्थानों ने यह खबर प्रसारित कर दी कि अदालत ने मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्टिंग तथ्यों के अनुरूप नहीं थी और इससे न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गलत संदेश गया।
रजिस्ट्री से ली गई जानकारी का हवाला
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उन्होंने स्वयं अदालत की रजिस्ट्री से इस संबंध में जानकारी प्राप्त की थी। जांच में यह सामने आया कि निर्धारित समय तक मामले से जुड़ा कोई दस्तावेज या याचिका दाखिल नहीं की गई थी। उनके अनुसार, सुबह 10 बजे तक अदालत के रिकॉर्ड में एक भी पृष्ठ जमा नहीं था, इसलिए यह कहना कि किसी याचिका को सूचीबद्ध करने से इनकार किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
प्रतिनिधित्व और याचिका में अंतर बताया
सीजेआई ने कहा कि अदालत को केवल एक पत्र या प्रतिनिधित्व प्राप्त होने भर से उसे रिट याचिका नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विधिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी, तब किसी साधारण पत्र को न्यायिक याचिका मानने का आधार क्या हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि न्यायिक मामलों की रिपोर्टिंग करते समय प्रक्रियात्मक तथ्यों को समझना आवश्यक है।
जिम्मेदार पत्रकारिता पर दिया जोर
बार एंड बेंच की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों के दौरान जिस तरह यह खबर प्रसारित हुई कि अदालत ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, वह पूरी तरह गलत थी। उनके अनुसार, बिना पर्याप्त पुष्टि के ऐसी खबरें प्रकाशित करना गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाही भरा रवैया दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि न्यायपालिका से जुड़ी खबरों में तथ्यों की पुष्टि और प्रक्रियात्मक सटीकता बनाए रखना बेहद आवश्यक है, ताकि आम जनता तक सही जानकारी पहुंचे और किसी प्रकार की गलतफहमी पैदा न हो।