Diplomacy – राष्ट्रीय हित पर शरद पवार ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की…
Diplomacy – एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने मुंबई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारधारात्मक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब बात देश के सम्मान और राष्ट्रीय हित की हो, तब सभी को एक साथ खड़ा होना चाहिए। पवार का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक माहौल काफी सक्रिय बना हुआ है।

राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुटता की जरूरत बताई
मंगलवार शाम आयोजित समारोह में शरद पवार ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे विदेशों में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। पवार ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि राष्ट्रीय हितों को पीछे छोड़ दिया जाए।
उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में कई ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भारत की गरिमा को प्राथमिकता दी। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल का भी जिक्र किया। पवार के मुताबिक, इन नेताओं ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को मजबूत करने का प्रयास किया।
शुरुआती राजनीतिक सफर की यादें कीं साझा
कार्यक्रम के दौरान शरद पवार ने अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1958 में उच्च शिक्षा के लिए वे बारामती से पुणे पहुंचे थे, क्योंकि उस समय उनके गृह क्षेत्र में कॉलेज की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ गए थे। बाद में उन्होंने पुणे शहर यूथ कांग्रेस और महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
पवार ने अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि युवा अवस्था में उन्हें देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से मिलने का अवसर मिला था। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन में हुई उस मुलाकात ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। पवार के अनुसार, उन्होंने किसानों और युवाओं से जुड़े कई सवाल तैयार किए थे, लेकिन नेहरू के व्यक्तित्व और प्रभाव के सामने वे अपने अधिकांश सवाल पूछ ही नहीं पाए।
इंदिरा गांधी से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया
अपने संबोधन में शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक पुराना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि सोवियत संघ की यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी ने भारतीय प्रधानमंत्री को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने पर नाराजगी जताई थी। पवार के अनुसार, इंदिरा गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वे करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और देश के सम्मान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के नेताओं ने हमेशा वैश्विक मंचों पर देश की गरिमा और सम्मान को सर्वोच्च महत्व दिया है। कार्यक्रम के अंत में पवार ने विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े पुराने सहयोगियों के एक मंच पर आने का स्वागत किया और कहा कि राष्ट्रीय हितों के मामलों में सहयोग और संवाद की भावना बनी रहनी चाहिए।