Iran – अमेरिकी हवाई कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
Iran– जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई अभियान चलाया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले के जवाब में की गई। इस सैन्य अभियान के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है, जबकि कई देशों ने घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए रखी है।

कई सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) के अनुसार, सैन्य अभियान करीब दो घंटे तक चला। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े कई ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई में कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन संचालन से जुड़े प्रतिष्ठानों के साथ कुछ वायु रक्षा प्रणालियों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि हमलों में हुए नुकसान को लेकर स्वतंत्र स्तर पर आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
अमेरिका और ईरान की प्रतिक्रियाएं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले के बाद जवाबी कार्रवाई आवश्यक थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों और राष्ट्रीय हितों पर किसी भी हमले को स्वीकार नहीं करेगा। दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित केशम द्वीप पर दो लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा ईरान के दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों में भी विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
क्षेत्र के अन्य देशों पर भी दिखा असर
संघर्ष का प्रभाव पश्चिम एशिया के अन्य हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर खड़े दो गैस जहाजों पर ड्रोन हमला हुआ, जिसके बाद उनमें आग लग गई। वहीं सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि ईरान समर्थित इराकी समूहों ने उसके तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। दूसरी ओर, यमन के हूथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी
बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिला है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ी अस्थिरता के कारण तेल आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 7.3 प्रतिशत बढ़कर 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
शांति प्रयासों पर भी पड़ा असर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए ओमान, कतर और कुछ अन्य खाड़ी देशों की ओर से मध्यस्थता के प्रयास किए जा रहे थे। हालांकि हालिया घटनाक्रम के बाद वार्ता की प्रक्रिया धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से किसी नई औपचारिक बातचीत की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव जल्द कम होने की संभावना को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।