MovieReview – ‘भाई तेरा स्टार है’ हंसी से ज्यादा उलझनों में उलझी कॉमेडी फिल्म
MovieReview – राघव जुयाल, संजय कपूर और निहारिका एनएम अभिनीत फिल्म ‘भाई तेरा स्टार है’ दर्शकों के सामने खुद को एक कॉमेडी एंटरटेनर के रूप में पेश करती है, लेकिन इसकी कहानी और प्रस्तुति उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। लगभग दो घंटे की यह फिल्म कई मौकों पर हास्य पैदा करने की कोशिश करती है, मगर अधिकांश दृश्य प्रभाव छोड़ने में असफल दिखाई देते हैं। घटनाओं का सिलसिला आगे बढ़ने के बजाय बार-बार एक ही तरह की परिस्थितियों में उलझता नजर आता है, जिससे फिल्म की गति भी प्रभावित होती है।

झूठ पर आधारित है पूरी कहानी
फिल्म की कहानी लंदन में संघर्ष कर रहे अभिनेता अजय के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार राघव जुयाल ने निभाया है। आर्थिक परेशानी में फंसा अजय कर्ज चुकाने के लिए अपनी बहन से जुड़ी एक झूठी कहानी गढ़ देता है। दूसरी ओर उसकी गर्लफ्रेंड रोशनी भी अपने परिवार से पैसे लेने के लिए खुद को गर्भवती बताने का सहारा लेती है। इन दोनों झूठों के कारण कई गलतफहमियां पैदा होती हैं और कहानी लगातार नए मोड़ लेने की कोशिश करती है। हालांकि घटनाओं का विस्तार कई जगह अनावश्यक रूप से लंबा महसूस होता है।
कलाकारों ने कोशिश की, लेकिन स्क्रिप्ट नहीं संभल सकी
राघव जुयाल ने अपने किरदार को निभाने का प्रयास किया है, लेकिन कमजोर लेखन के कारण उनका अभिनय अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाता। कई संवाद और हास्य दृश्य स्वाभाविक नहीं लगते, जिससे कॉमिक टाइमिंग भी कमजोर पड़ जाती है। संजय कपूर अपने अनुभव के साथ भूमिका को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन सीमित स्क्रिप्ट उन्हें भी ज्यादा अवसर नहीं देती। निहारिका एनएम, विवान भटेना, निकी वालिया, बरखा सिंह, विकल्प मेहता और पार्वती ओमनाकुट्टन जैसे कलाकार अपने हिस्से का काम ईमानदारी से करते हैं, हालांकि उनके किरदारों का विकास पर्याप्त नहीं दिखता।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले रहे कमजोर पक्ष
निर्देशक विवेक बी. अग्रवाल ने फिल्म में तेज रफ्तार, एनिमेटेड ग्राफिक्स और लगातार दृश्य परिवर्तन के जरिए मनोरंजन का माहौल बनाने का प्रयास किया है। इसके बावजूद स्क्रीनप्ले में संतुलन और प्रवाह की कमी महसूस होती है। कई दृश्य बिना मजबूत आधार के आगे बढ़ते हैं और हास्य को प्रभावी बनाने के लिए स्क्रीन पर अतिरिक्त ग्राफिक्स तथा लिखित टेक्स्ट का इस्तेमाल किया गया है। इससे कहानी स्वाभाविक बनने के बजाय कृत्रिम लगने लगती है।
क्या काम करता है और क्या नहीं
फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसकी पटकथा और कॉमेडी का निष्पादन माना जा सकता है। कहानी में कई ऐसे मोड़ हैं जो विश्वसनीय नहीं लगते और दर्शकों को पात्रों से भावनात्मक रूप से जोड़ने में भी सफल नहीं होते। लगातार शोर, जल्दबाजी में आगे बढ़ते दृश्य और कमजोर हास्य फिल्म के अनुभव को प्रभावित करते हैं। हालांकि कलाकारों की कोशिश और कुछ हल्के-फुल्के पल फिल्म को पूरी तरह नीरस होने से बचाते हैं, लेकिन वे समग्र प्रभाव बदलने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
देखें या छोड़ दें
यदि आप हल्की-फुल्की कॉमेडी की तलाश में हैं और सिर्फ समय बिताने के उद्देश्य से फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। लेकिन मजबूत कहानी, प्रभावी हास्य और यादगार किरदारों की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को यह फिल्म शायद पूरी तरह संतुष्ट न कर सके। कुल मिलाकर, ‘भाई तेरा स्टार है’ अपनी दिलचस्प अवधारणा के बावजूद उसे प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतारने में पीछे रह जाती है।