झारखण्ड

RajyaSabhaPolls – नामांकन मंजूर होने के बाद राज्यसभा चुनाव में बढ़ी हलचल

RajyaSabhaPolls – झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को बड़ी राहत मिली है। नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद उनकी उम्मीदवारी को वैध घोषित कर दिया गया है। इससे पहले उनके नामांकन से जुड़े कुछ बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज होने के कारण मामला विचाराधीन रखा गया था। अब चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है और मुकाबला तीन उम्मीदवारों के बीच सिमट गया है।

आपत्तियों के बाद मांगा गया था जवाब

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान परिमल नाथवानी के दस्तावेजों को लेकर कुछ सवाल उठाए गए थे। रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से संबंधित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसके बाद उम्मीदवार ने आवश्यक जानकारी और जवाब प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने जवाबों की समीक्षा करने के बाद उन्हें संतोषजनक माना और नामांकन को वैध करार दिया।

इस प्रक्रिया के साथ ही नामांकन पर दर्ज आपत्तियों का निपटारा भी कर दिया गया। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच और निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार किए गए हैं।

अब तीन उम्मीदवारों के बीच होगा मुकाबला

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राज्यसभा चुनाव के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी शामिल हैं। तीनों उम्मीदवार अपने-अपने समर्थन आधार को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

राजनीतिक दलों की ओर से भी विधायकों के साथ लगातार संवाद और बैठकों का दौर जारी है। ऐसे में आगामी मतदान को लेकर राज्य की राजनीति में उत्सुकता बढ़ गई है।

विधानसभा का अंकगणित बना चर्चा का विषय

राज्यसभा चुनाव में जीत का रास्ता विधानसभा में मौजूद संख्या बल से होकर गुजरता है। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त विधायक संख्या होने की बात कही जा रही है, जिससे दोनों सीटों पर उसकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

हालांकि, निर्दलीय उम्मीदवार के चुनाव मैदान में बने रहने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के रुख और मतदान के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति पर भी नजर रखी जा रही है।

अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पर टिकी निगाहें

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि निर्दलीय उम्मीदवार के लिए मुकाबला आसान नहीं होगा। विधानसभा में उपलब्ध समर्थन के आधार पर उन्हें अतिरिक्त मतों की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में प्राथमिकता आधारित मतदान और विभिन्न दलों के विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में अक्सर गणित और रणनीति दोनों समान रूप से अहम होते हैं। यही कारण है कि सभी दल अपने विधायकों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।

नतीजों को लेकर बढ़ी उत्सुकता

चुनाव को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह के दावे की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल सभी निगाहें मतदान और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम नतीजे यह तय करेंगे कि विधानसभा का अंकगणित कितना प्रभावी साबित हुआ और विभिन्न दलों की चुनावी रणनीति किस हद तक सफल रही। राज्यसभा की दोनों सीटों के लिए होने वाला यह चुनाव झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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