DeepSeaExploration – समुद्र मंथन मिशन को मिली बड़ी मंजूरी, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
DeepSeaExploration – केंद्र सरकार ने देश में गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को गति देने के उद्देश्य से “समुद्र मंथन” मिशन के लिए 84,084 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इस योजना को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य समुद्र के भीतर मौजूद संभावित हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज बढ़ाकर भविष्य में आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को मजबूत करना है।

क्या है समुद्र मंथन मिशन?
समुद्र मंथन मिशन, जिसे राष्ट्रीय डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन कार्यक्रम भी कहा जा रहा है, का उद्देश्य गहरे समुद्री क्षेत्रों में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों की खोज करना है। विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र के भीतर मौजूद भंडारों तक पहुंचना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और अत्यधिक खर्चीला होता है। इसी कारण इस क्षेत्र में बड़े निवेश और उन्नत तकनीक की आवश्यकता पड़ती है। सरकार का मानना है कि इस पहल से आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा क्षमता को नई मजबूती मिल सकती है।
84,084 करोड़ रुपये का निवेश किन कार्यों में होगा?
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार यह राशि वित्त वर्ष 2030-31 तक चरणबद्ध तरीके से खर्च की जाएगी। योजना के तहत समुद्र तल के नीचे संभावित तेल और गैस भंडारों की मैपिंग, डीपवॉटर ड्रिलिंग, खोजे गए संसाधनों के व्यावसायिक विकास और आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण पर निवेश किया जाएगा। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। सरकार जोखिम कम करने के लिए कुछ परियोजनाओं में लागत साझेदारी का मॉडल भी अपनाएगी।
किन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष ध्यान?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी बेसिन और अंडमान क्षेत्र को गहरे समुद्र में ऊर्जा संसाधनों की खोज के लिए संभावनाओं वाला क्षेत्र माना है। इन समुद्री इलाकों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से नए अन्वेषण अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डीपवॉटर परियोजनाओं में एक कुएं के विकास पर भारी निवेश की जरूरत होती है, इसलिए सरकारी सहयोग इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
योजना की जरूरत क्यों महसूस हुई?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा और प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण भाग विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता घटेगी और लंबे समय में विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। इसी सोच के तहत इस मिशन को रणनीतिक महत्व दिया गया है।
आगे की रणनीति और संभावित लक्ष्य
सरकारी तेल एवं गैस कंपनियां पहले से ही कई अपतटीय क्षेत्रों में अन्वेषण कार्य कर रही हैं। ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियां गहरे समुद्र में नए कुओं की ड्रिलिंग के साथ आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अन्वेषण गतिविधियों का विस्तार, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और सामरिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करना है। इसके साथ ही भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने तथा भविष्य में वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितताओं से बेहतर तरीके से निपटने की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।