स्वास्थ्य

Diabetes – क्या सिर्फ ज्यादा चीनी खाने से होती है डायबिटीज, जानिए असली कारण…

Diabetes – डायबिटीज आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, दुनिया भर में 58 करोड़ से अधिक वयस्क इस बीमारी से प्रभावित हैं और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी चुनौती यह भी है कि अनेक लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें डायबिटीज है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि क्या केवल चीनी खाना ही इस बीमारी का कारण है या इसके पीछे अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं।

केवल चीनी नहीं, कई कारण बढ़ाते हैं जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज सिर्फ अधिक चीनी खाने से होने वाली बीमारी नहीं है। यह एक मेटाबॉलिक समस्या है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता। इसके कारण रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है। हालांकि, लगातार अधिक मात्रा में मीठे खाद्य पदार्थ और शर्करा युक्त पेय लेने से वजन बढ़ सकता है, जो टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।

लाइफस्टाइल का भी पड़ता है सीधा असर

डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना, मोटापा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना भी डायबिटीज की संभावना बढ़ा सकते हैं। ये सभी कारक शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं। इसलिए केवल मिठाई से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संतुलित जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।

किन खाद्य पदार्थों से रखें दूरी?

विशेषज्ञ बताते हैं कि केवल चीनी ही नहीं, बल्कि सफेद ब्रेड, मैदा, केक, बिस्कुट, पैकेज्ड जूस, मीठे पेय और अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थ भी रक्त शर्करा के स्तर और वजन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अतिरिक्त चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा अधिक मात्रा में होती है। इनका नियमित सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके साथ ही लगातार तनाव और नींद की कमी हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर शरीर में ग्लूकोज नियंत्रण की क्षमता को कमजोर कर सकती है।

वजन नियंत्रण और सक्रिय दिनचर्या है बचाव का आधार

डॉक्टरों के अनुसार, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी टाइप-2 डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। मोटापे के कारण शरीर में सूजन बढ़ सकती है और इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और स्वस्थ वजन बनाए रखना डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकता है। यदि बार-बार प्यास लगना, अधिक पेशाब आना, थकान, धुंधला दिखाई देना या बिना कारण वजन घटना जैसे लक्षण महसूस हों, तो समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते पहचान और सही जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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