LungCancer – फेफड़ों के कैंसर के चरण समझें, समय पर पहचान से बढ़ती है इलाज की संभावना
LungCancer – फेफड़े शरीर के उन प्रमुख अंगों में शामिल हैं जो हर पल ऑक्सीजन पहुंचाकर जीवन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब इन्हीं फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तब लंग्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारी विकसित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में इस बीमारी की पहचान हो जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बेहतर रहती है। यही कारण है कि फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों और उसके विभिन्न चरणों की जानकारी होना बेहद जरूरी माना जाता है।

वर्ल्ड लंग कैंसर डे का उद्देश्य
हर वर्ष 1 अगस्त को दुनियाभर में वर्ल्ड लंग कैंसर डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच के लिए प्रेरित करना और मरीजों के उपचार व सहायता को बढ़ावा देना है। फोरम ऑफ इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज ने वर्ष 2012 में इस पहल की शुरुआत की थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है। पहले इसे मुख्य रूप से धूम्रपान से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब ऐसे मामलों की संख्या भी बढ़ रही है जिनमें मरीज ने कभी धूम्रपान नहीं किया होता।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंग्स कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारी जैसे दिखाई देते हैं। लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण या बिना कारण वजन घटना जैसे संकेत अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर टाल देते हैं। जब तक विस्तृत जांच कराई जाती है, कई मामलों में बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है। फेफड़ों के कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर है, जो लगभग 85 प्रतिशत मामलों में पाया जाता है, जबकि स्मॉल सेल लंग कैंसर अपेक्षाकृत अधिक तेजी से फैलने वाला माना जाता है।
स्टेज-1 और स्टेज-2 में इलाज की संभावना अधिक
स्टेज-1 में कैंसर केवल फेफड़े तक सीमित रहता है और आसपास के लिम्फ नोड्स या अन्य अंगों तक नहीं पहुंचता। इस चरण में ट्यूमर अपेक्षाकृत छोटा होता है और कई मरीजों में कोई स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते। कुछ लोगों को हल्की खांसी या सांस लेने में मामूली परेशानी महसूस हो सकती है। स्टेज-2 तक पहुंचने पर ट्यूमर का आकार बढ़ सकता है या पास के लिम्फ नोड्स प्रभावित होने लगते हैं। इस समय लगातार खांसी, खांसी में खून, सीने में दर्द, थकान और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।
स्टेज-3 और स्टेज-4 में बढ़ जाती है गंभीरता
स्टेज-3 को बीमारी का उन्नत चरण माना जाता है, जिसमें कैंसर छाती के आसपास के ऊतकों या लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है। इस दौरान मरीज को तेज खांसी, खून आना, आवाज बैठना, निगलने में परेशानी और लगातार सीने में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। स्टेज-4 में कैंसर फेफड़ों से आगे बढ़कर मस्तिष्क, हड्डियों, लिवर, एड्रिनल ग्रंथियों या दूसरे फेफड़े तक फैल सकता है। इस अवस्था को मेटास्टेटिक लंग कैंसर कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस चरण में उपचार का मुख्य उद्देश्य बीमारी की गति को नियंत्रित करना, लक्षणों को कम करना और मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना होता है। इसलिए किसी भी लंबे समय तक बने रहने वाले श्वसन संबंधी लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण है।