राष्ट्रीय

MonsoonSession – मानसून सत्र के अंतिम चरण में सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव

MonsoonSession – संसद के मानसून सत्र के समापन में अब कुछ ही कार्यदिवस शेष हैं और इस दौरान सरकार तथा विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार सोमवार को कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति पर कायम है। लगातार हो रहे विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई है, हालांकि सरकार का कहना है कि सत्र समाप्त होने से पहले आवश्यक विधायी कार्य पूरे करने का प्रयास जारी रहेगा।

चार प्रमुख विधेयकों पर सरकार का फोकस

सरकार सोमवार को चार अहम विधेयकों को संसद में आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। इनमें सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने से जुड़ा संशोधन विधेयक प्रमुख है। प्रस्ताव के अनुसार मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान किया गया है, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इसी के साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से संबंधित संशोधन विधेयक भी पेश किया जाएगा। इसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में भुगतान से जुड़ी देरी कम करना और कारोबार को अधिक प्रभावी कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना है। इसके अलावा भारतीय सांख्यिकी संस्थान को नया वैधानिक ढांचा देने तथा बैंकिंग रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े कानूनों को आधुनिक बनाने वाले विधेयक भी सरकार के एजेंडे में शामिल हैं।

सरकार ने विपक्ष से सहयोग की अपील की

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही में लगातार व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन लगातार हंगामे के कारण संसद का काम प्रभावित हो रहा है। सरकार ने विपक्ष से अपील की है कि वह बहस में भाग लेकर अपनी बात रखे ताकि विधायी प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।

विपक्ष किन मुद्दों पर बना रहा दबाव

दूसरी ओर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सोमवार को अपने फ्लोर लीडर्स की बैठक कर आगे की रणनीति तय की। विपक्ष राम मंदिर से जुड़े दान मामले में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। इस प्रकरण में पहले पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया था। विपक्ष इस मामले में सरकार से स्पष्ट जवाब चाहता है।

छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई भी बना मुद्दा

विपक्ष ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस विषय पर गृह मंत्री अमित शाह सदन में विस्तृत बयान दें। उनका आरोप है कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन से निपटने के तरीके पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

एफसीआरए संशोधन विधेयक पर भी नजर

सरकार आगामी दिनों में विदेशी अंशदान विनियमन कानून से जुड़े संशोधन विधेयक को भी संसद में ला सकती है। प्रस्तावित बदलावों में ऐसे संगठनों की संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं, जिन्होंने समय पर एफसीआरए पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया है। तृणमूल कांग्रेस ने इस विधेयक को पहले संसदीय समिति के पास भेजकर विस्तृत समीक्षा कराने की मांग की है।

पहले भी हंगामे के बीच हुए थे विधायी फैसले

मानसून सत्र के दौरान इससे पहले भी कई अवसरों पर विपक्ष के विरोध और शोर-शराबे के बीच महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए थे। इनमें वंदे मातरम से संबंधित कानूनी संरक्षण वाला विधेयक और जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन से जुड़ा विधेयक शामिल हैं। अब सत्र के अंतिम दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अपने शेष विधायी एजेंडे को कितना आगे बढ़ा पाती है और विपक्ष की आपत्तियों के बीच संसद की कार्यवाही किस तरह संचालित होती है।

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