ExamReforms – अधूरे हैं कैबिनेट के फैसले, परीक्षा केंद्रों पर अब भी निर्भर एनटीए व्यवस्था
ExamReforms – राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधारों को लेकर लगातार घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं कि एजेंसी के गठन के समय तय किए गए कई अहम प्रावधान आज भी पूरी तरह लागू नहीं हो सके हैं। हाल ही में एनटीए ने टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन अधिकारी (जीएम-टीसीएनओ) के पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पद का प्रमुख दायित्व मानकों के अनुरूप परीक्षा केंद्रों की पहचान और उनके संचालन से जुड़ी व्यवस्था विकसित करना होगा। इसी के साथ एजेंसी की मौजूदा परीक्षा केंद्र व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अपने परीक्षा केंद्र बनाने की योजना अब तक अधूरी
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनटीए के गठन को मंजूरी देते समय देशभर में लगभग 500 स्थायी परीक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना को भी स्वीकृति दी थी। इन केंद्रों का उद्देश्य परीक्षाओं के संचालन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना था। हालांकि कई वर्ष बीत जाने के बावजूद एजेंसी अपने स्वतंत्र परीक्षा केंद्र विकसित नहीं कर सकी और अधिकांश परीक्षाएं अब भी किराये के केंद्रों पर आयोजित की जा रही हैं। इससे प्रारंभिक योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच का लक्ष्य भी पूरा नहीं
दस्तावेजों में यह भी प्रस्तावित था कि तहसील और जिला स्तर पर विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरदराज के इलाकों में कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों से छात्रों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिलने के साथ परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने की भी उम्मीद थी। बाद में पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति ने भी ऐसे स्थायी केंद्रों के निर्माण की सिफारिश की थी, लेकिन यह प्रस्ताव अब तक लागू नहीं हो पाया है।
कई प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी लंबित
एनटीए के संचालन को मजबूत बनाने के लिए नौ अलग-अलग वर्टिकल, एक शासी मंडल और शिक्षाविद की अध्यक्षता वाली व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया था। इसके अलावा परीक्षार्थियों से प्राप्त आवेदन शुल्क के आधार पर आधुनिक सुविधाओं से लैस परीक्षा भवन तैयार करने की योजना भी बनाई गई थी। इन केंद्रों में कंप्यूटर, सीसीटीवी, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जानी थीं, लेकिन इन योजनाओं का बड़ा हिस्सा अभी तक अमल में नहीं आ सका है।
वर्ष में दो परीक्षाओं की व्यवस्था सीमित रही
कैबिनेट स्तर पर यह भी तय किया गया था कि प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाएं वर्ष में दो बार ऑनलाइन माध्यम से आयोजित हों ताकि विद्यार्थियों पर एक बार की परीक्षा का दबाव कम हो सके। हालांकि यह व्यवस्था फिलहाल मुख्य रूप से जेईई मेन तक ही सीमित है। ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए पूर्व अभ्यास की सुविधा और पर्वतीय एवं दूरस्थ राज्यों के लिए मोबाइल टेस्ट सेंटर जैसी योजनाएं भी अभी तक लागू नहीं हो सकी हैं।
भर्ती परीक्षा मामलों की सुनवाई अब भी लंबित
भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अपनी जांच पूरी कर चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अब भी लंबित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देशभर में 158 मामलों की जांच पूरी होने के बावजूद अनेक मामलों में अदालतों में सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। अब इन मामलों को नए पेपर लीक निरोधक कानून के तहत स्थापित किए जा रहे फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजने की तैयारी की जा रही है।
बढ़ी आय, लेकिन सुधारों पर सवाल कायम
एनटीए को वर्ष 2018 में शुरुआती संचालन के लिए केंद्र सरकार से 25 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी। इसके बाद एजेंसी का प्रमुख आय स्रोत विभिन्न परीक्षाओं से प्राप्त आवेदन शुल्क बना। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में एजेंसी की आय लगभग 504 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 1117 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। आय में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद बुनियादी परीक्षा ढांचे और पहले से स्वीकृत सुधारों के अधूरे रहने को लेकर चर्चा जारी है।