US: अमेरिकी वीजा नीतियों में सख्ती: ट्रंप सरकार के फैसलों से भारतीय पेशेवरों के सपनों पर संकट का काला बादल
US: अमेरिका जाने का सपना देखने वाले लाखों भारतीय युवाओं के लिए हाल के दिनों में एक के बाद एक बुरी खबरें आ रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई वाली सरकार ने इमीग्रेशन नियमों को इतना कड़ा कर दिया है कि कुशल कामगारों के लिए मुख्य रास्ता माने जाने वाले एच-1बी वीजा पर भी अब भारी पड़ाव आ गया है। जनवरी 2025 से लेकर अब तक करीब 85,000 वीजा रद्द हो चुके हैं, जिसमें छात्र वीजा भी शामिल हैं। खासकर भारत से आवेदन करने वाले पेशेवरों को इंटरव्यू स्थगित होने की मार झेलनी पड़ रही है, जो मार्च 2026 तक खिंच सकती है। यह बदलाव न सिर्फ व्यक्तिगत करियर को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहे हैं, क्योंकि भारतीय आईटी विशेषज्ञ वहां की तकनीकी कंपनियों की रीढ़ हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं, लेकिन इससे विदेशी कामगारों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

ट्रंप प्रशासन की नई इमीग्रेशन रणनीति का खुलासा
ट्रंप सरकार ने इस साल की शुरुआत से ही इमीग्रेशन पर अपनी पकड़ मजबूत करने का अभियान चला रही है। जनवरी से दिसंबर तक 85,000 से ज्यादा वीजा रद्द करने का आंकड़ा अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। इनमें से 8,000 से अधिक छात्र वीजा थे, जिन्हें डीयूआई यानी शराब पीकर गाड़ी चलाने, चोरी या हमले जैसे अपराधों के आधार पर रद्द किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो का एकमात्र उद्देश्य अमेरिका को सुरक्षित बनाना है। लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि रद्दीकरण की दर पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति अब सिर्फ अपराधी गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि सामान्य आवेदकों की जांच को भी व्यापक बना दिया गया है। उदाहरण के लिए, अगस्त में घोषित योजना के तहत 5.5 करोड़ से ज्यादा वैध वीजा धारकों की लगातार निगरानी की जा रही है। इसका मतलब है कि वीजा मिलने के बाद भी अगर कोई नई जानकारी सामने आती है, तो उसे तुरंत रद्द किया जा सकता है। भारतीय पेशेवर, जो अमेरिकी कंपनियों में 70 प्रतिशत से ज्यादा एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हैं, इस बदलाव से सबसे ज्यादा चिंतित हैं।
एच-1बी वीजा आवेदकों पर सोशल मीडिया जांच का बोझ
एच-1बी वीजा, जो कुशल विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में तीन से छह साल तक काम करने की अनुमति देता है, अब एक नई चुनौती का सामना कर रहा है। 15 दिसंबर 2025 से लागू हो रही नई व्यवस्था के तहत सभी आवेदकों को अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल सार्वजनिक करनी होगी। अमेरिकी अधिकारी अब फेसबुक, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट, कमेंट्स और फॉलोअर्स की गहन समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवेदक अमेरिकी सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा न बनें। एक प्रमुख इमीग्रेशन वकील स्टीवन ब्राउन ने कहा कि यह बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, लेकिन इससे प्रक्रिया जटिल हो गई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर वीजा निर्णय एक सुरक्षा फैसला है, और वीजा कोई अधिकार नहीं बल्कि विशेषाधिकार है। भारत में चेन्नई और हैदराबाद जैसे दूतावासों में दिसंबर के मध्य से अंत तक निर्धारित इंटरव्यू मार्च 2026 तक टाल दिए गए हैं। प्रभावित आवेदकों को ईमेल से नई तारीख बताई जा रही है, लेकिन संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। दूतावास ने चेतावनी दी है कि पुरानी तारीख पर पहुंचने वाले आवेदकों को प्रवेश ही नहीं मिलेगा।
भारतीय आईटी पेशेवरों पर बढ़ता दबाव और आर्थिक प्रभाव
भारतीय आईटी कंपनियां जैसे टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो एच-1बी वीजा पर बुरी तरह निर्भर हैं। सितंबर 2025 में ट्रंप ने नए आवेदनों पर एकमुश्त 1,00,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) का शुल्क लगाया, जो नियोक्ताओं के लिए भारी बोझ है। हालांकि, मौजूदा वीजा धारकों और छात्रों को इससे छूट मिली है, लेकिन नए आवेदकों के लिए यह बाधा करियर के रास्ते रोक रही है। अब तीसरे देशों में इंटरव्यू की सुविधा भी खत्म हो गई है; आवेदकों को केवल अपने देश में ही जाना पड़ता है। इससे बैकलॉग बढ़ गया है। इमीग्रेशन वकील एलेन फ्रीमैन के अनुसार, हैदराबाद कंसुलेट में 15 दिसंबर की तारीख मार्च में, 16-17 दिसंबर की अप्रैल में और 18 दिसंबर की मई 2026 में शिफ्ट कर दी गई हैं। एक आवेदक ने रेडिट पर शेयर किया कि उनका बायोमेट्रिक अपॉइंटमेंट तो हो गया, लेकिन इंटरव्यू तीन महीने बाद हो गया, जिससे अमेरिका लौटने का प्लान बिगड़ गया। विशेषज्ञ चेताते हैं कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है, क्योंकि कुशल भारतीय कामगार वहां की टेक इंडस्ट्री को चला रहे हैं। भारत सरकार ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है, लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मेजबान देश का अधिकार है कि वह जांच करे।
विवादास्पद मामलों में वीजा रद्दीकरण की नई लहर
ट्रंप प्रशासन ने विवादास्पद घटनाओं को आधार बनाकर भी वीजा रद्द किए हैं। अक्टूबर में कंजर्वेटिव कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या पर कथित जश्न मनाने वालों के वीजा रद्द हो गए। इसी तरह, गाजा संघर्ष से जुड़े छात्र प्रदर्शनों में शामिल विदेशी छात्रों पर कड़ी कार्रवाई हुई। अफगान मूल के एक व्यक्ति द्वारा नेशनल गार्ड सैनिकों पर हमले के बाद कुछ देशों से ग्रीन कार्ड और नागरिकता आवेदनों को रोक दिया गया। ये उदाहरण दिखाते हैं कि नीति अब राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों तक फैल गई है। छात्रों के मामले में अप्रैल 2025 से शुरू हुई जांच ने कई मामलों में स्वदेश वापसी का दबाव बनाया। कुल मिलाकर, ये बदलाव इमीग्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं।
भविष्य की राह: क्या करें प्रभावित आवेदक?
इस संकट के बीच प्रभावित भारतीय पेशेवरों के लिए सलाह है कि वे दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर रखें और नई तारीख पर ही पहुंचें। इमीग्रेशन वकीलों से संपर्क करें जो सोशल मीडिया प्रोफाइल को सुरक्षित तरीके से तैयार करने में मदद कर सकें। लंबे इंतजार के दौरान भारत में ही रिमोट वर्क या वैकल्पिक देशों जैसे कनाडा या यूरोप की संभावनाओं पर विचार करें। ट्रंप प्रशासन की नीतियां 2026 तक जारी रह सकती हैं, इसलिए धैर्य और योजना जरूरी है। कुल शब्द गिनती: 852।



