Aortic Aneurysm – ध्यान दें! जानलेवा बीमारी का संकेत भी हो सकता है पीठ और पेट का दर्द
Aortic Aneurysm – कई बार शरीर में होने वाले कुछ दर्द या असहजता को लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यही लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकती है। इंग्लैंड के 78 वर्षीय जॉन सिम्पसन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब पीठ और पेट में लगातार होने वाला तेज दर्द बाद में एक खतरनाक बीमारी का संकेत साबित हुआ।

दर्द को समझा सामान्य समस्या
जॉन सिम्पसन को लंबे समय से पीठ और पेट में असहनीय दर्द महसूस हो रहा था। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य शारीरिक परेशानी मानकर अनदेखा किया। यहां तक कि शुरुआती जांच के दौरान डॉक्टरों ने भी इसे मांसपेशियों से जुड़ी समस्या समझा और दर्द कम करने के लिए साधारण दवा लेने की सलाह दी। कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
रातोंरात बिगड़ी हालत
सितंबर 2024 में एक रात अचानक तेज दर्द के कारण जॉन की नींद खुल गई। दर्द इतना अधिक था कि उन्हें बार-बार उल्टियां होने लगीं। परिवार के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। प्रारंभिक जांच में कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई, लेकिन अगले ही दिन दर्द दोबारा बढ़ने पर विस्तृत स्कैन कराया गया। जांच में पता चला कि उनकी महाधमनी (एओर्टा) असामान्य रूप से फूल चुकी थी और उसमें गंभीर क्षति भी हो चुकी थी।
क्या है एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म?
डॉक्टरों ने जॉन की स्थिति को एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म (AAA) बताया। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर की सबसे बड़ी धमनी एओर्टा की दीवार कमजोर होकर बाहर की ओर फैलने लगती है। सामान्य रूप से एओर्टा का आकार लगभग 2 सेंटीमीटर होता है, लेकिन जॉन के मामले में इसका आकार बढ़कर करीब 13 सेंटीमीटर तक पहुंच गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है। कई मरीजों को लंबे समय तक इसकी जानकारी तक नहीं होती और जब तक इसका पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है।
बीमारी फटने पर बढ़ जाता है खतरा
वैस्कुलर सर्जन डॉ. रैचल फोर्साइथ के मुताबिक, एन्यूरिज्म के फटने पर अचानक पेट या पीठ में तेज दर्द शुरू हो सकता है। इसके साथ ही रक्तचाप तेजी से गिरने लगता है, जो जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मृत्यु दर काफी अधिक होती है, इसलिए समय रहते पहचान और उपचार बेहद जरूरी है।
पुरुषों में अधिक क्यों होता है जोखिम?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है। इसके पीछे हार्मोनल कारणों को भी जिम्मेदार माना जाता है। महिलाओं में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन धमनी की दीवारों को सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि पुरुषों में यह प्राकृतिक सुरक्षा अपेक्षाकृत कम होती है। इसी वजह से पुरुषों में इस बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
धूम्रपान और हाई ब्लड प्रेशर बड़े कारण
विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान इस बीमारी के सबसे बड़े जोखिम कारकों में शामिल है। सिगरेट का धुआं रक्त वाहिकाओं में सूजन बढ़ाता है और धमनी की दीवारों को कमजोर कर सकता है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर और पारिवारिक इतिहास भी जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण माने जाते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले किसी सदस्य को यह समस्या रही हो, उनमें इसकी संभावना अधिक रहती है।
समय पर जांच से बच सकती है जान
चिकित्सकों का कहना है कि 65 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को नियमित जांच जरूर करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड जैसी सरल जांच के माध्यम से इस बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। यदि समय रहते एन्यूरिज्म का पता चल जाए तो सर्जरी या अन्य उपचार के जरिए गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
शोध में दिखी नई उम्मीद
फिलहाल ऐसी कोई दवा उपलब्ध नहीं है जो सीधे तौर पर एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म की बढ़ोतरी को रोक सके। हालांकि हाल के कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मेटफॉर्मिन दवा धमनी में होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिक इस दिशा में और शोध कर रहे हैं ताकि भविष्य में बेहतर उपचार विकल्प विकसित किए जा सकें।
जॉन सिम्पसन की सफल सर्जरी हो चुकी है और वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं। उनका मामला इस बात की याद दिलाता है कि लगातार रहने वाले असामान्य दर्द को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि समय पर की गई जांच कई बार जीवन बचा सकती है।