Mann Ki Baat 2026: मन की बात में पीएम मोदी ने युवाओं और स्टार्टअप्स की सफलता को सराहा
Mann Ki Baat 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बेहद लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 130वें एपिसोड के माध्यम से एक बार फिर देश की जनता के साथ सीधा संवाद किया। साल 2026 के इस पहले संबोधन में उन्होंने समस्त देशवासियों को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बधाई दी और संविधान निर्माताओं के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। पीएम मोदी ने आज के दिन को विशेष बताते हुए कहा कि (Democratic Citizenship Values) को समझना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है क्योंकि आज ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ भी है। उन्होंने मतदाताओं को लोकतंत्र की आत्मा बताया और अपील की कि जब भी कोई युवा पहली बार वोटर बने, तो उसका स्वागत पूरे उत्साह और मिठाई बांटकर किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर 2016 की यादों का दिलचस्प ट्रेंड
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान वर्तमान में सोशल मीडिया पर चल रहे एक खास ट्रेंड का जिक्र किया, जहां लोग अपने दस साल पुराने पलों को साझा कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने साल 2016 की अपनी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उस समय भारत ने एक अत्यंत महत्वाकांक्षी यात्रा की नींव रखी थी। प्रधानमंत्री ने (Entrepreneurial Visionary Goals) को याद करते हुए कहा कि एक छोटा सा कदम आज एक विशाल आंदोलन बन चुका है। दस साल पहले शुरू की गई उन योजनाओं ने आज भारत के युवाओं के सोचने के तरीके और उनके आत्मविश्वास को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत की वैश्विक छलांग
भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने गर्व के साथ बताया कि आज हमारा देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप केंद्र बन चुका है। उन्होंने उन क्षेत्रों का उल्लेख किया जहां आज के युवा अपनी पहचान बना रहे हैं, जैसे कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और सेमीकंडक्टर। प्रधानमंत्री ने कहा कि (Global Startup Ecosystem) में भारत की यह भागीदारी दर्शाती है कि हमारे युवा अब लीक से हटकर सोचने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने उन सभी युवाओं को सलाम किया जो रिस्क लेकर अपना खुद का स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और देश के भविष्य को संवार रहे हैं।
तमसा नदी का पुनरुद्धार और पर्यावरण संरक्षण
पर्यावरण के प्रति जन-भागीदारी का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने अयोध्या की तमसा नदी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे लोगों के सामूहिक प्रयास से एक मरती हुई नदी को नया जीवन मिला है। प्रदूषण के कारण जिस नदी की धारा रुक गई थी, उसे सफाई और वृक्षारोपण के माध्यम से फिर से अविरल बना दिया गया है। (Environmental Restoration Projects) की सफलता यह साबित करती है कि यदि समाज ठान ले, तो वह अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को विलुप्त होने से बचा सकता है। तमसा नदी का यह अभियान पूरे देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरा है।
युवाओं के बीच उभरता नया सांस्कृतिक और भक्ति चलन
प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं के बदलते दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि आज भक्ति और संस्कृति ने एक नया रूप ले लिया है। अब युवा अपनी जीवनशैली के साथ आध्यात्मिकता को जोड़ रहे हैं, जिससे शहरों में एक अलग ही प्रकार का सांस्कृतिक उत्साह देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि किस तरह (Cultural Vibrancy Movement) के तहत आज के कॉन्सर्ट और आयोजन भारतीय संगीत और परंपराओं को आधुनिक ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। यह न केवल हमारी संस्कृति को जीवंत रख रहा है, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतवंशियों के माध्यम से हमारे त्योहारों को वैश्विक पहचान भी दिला रहा है।
विकसित भारत के निर्माण में जन-भागीदारी का महत्व
अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने सामूहिक शक्ति और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे वह जल संरक्षण हो या स्टार्टअप क्रांति, हर सफलता के पीछे आम आदमी का संकल्प छिपा है। उन्होंने नागरिकों को (Sustainable Growth Objectives) के प्रति जागरूक रहने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। मोदी ने विश्वास जताया कि साल 2026 की यह शुरुआत भारत को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगी और देश विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में और अधिक तेजी से कदम बढ़ाएगा।