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CinemaLegacy – ‘उड़ता पंजाब’ के निर्माण से जुड़ा दिलचस्प खुलासा

CinemaLegacy – फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के रिलीज़ होने के लगभग एक दशक बाद इसके निर्देशक अभिषेक चौबे ने निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि यह फिल्म अपने विषय और प्रस्तुति के कारण पारंपरिक व्यावसायिक फिल्मों से अलग थी, इसलिए इसे तैयार करना आसान नहीं था। उनके अनुसार, यदि मुख्य कलाकारों ने सहयोगात्मक रुख न अपनाया होता, तो इस परियोजना को पूरा करना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता था।

साल 2016 में रिलीज़ हुई यह फिल्म नशे की समस्या और उससे जुड़े सामाजिक प्रभावों पर आधारित थी। अपने गंभीर विषय और अलग अंदाज के कारण फिल्म ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का ध्यान आकर्षित किया था।

कलाकारों के सहयोग से आसान हुई राह

अभिषेक चौबे ने एक बातचीत में बताया कि फिल्म की आर्थिक संरचना सीमित थी। ऐसे में प्रमुख कलाकारों का सहयोग बेहद अहम साबित हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय आलिया भट्ट अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, जबकि शाहिद कपूर और करीना कपूर पहले से स्थापित सितारे थे।

निर्देशक के मुताबिक, यदि प्रमुख कलाकारों ने अपनी पारिश्रमिक राशि में लचीलापन नहीं दिखाया होता, तो फिल्म को निर्धारित संसाधनों में पूरा करना मुश्किल हो सकता था। उन्होंने माना कि कलाकारों के इस सहयोग ने परियोजना को वास्तविक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यधारा सिनेमा से अलग थी फिल्म

अभिषेक चौबे का कहना है कि शुरुआत में उन्हें नहीं लगा था कि इस तरह की कहानी में बड़े कलाकार दिलचस्पी दिखाएंगे। फिल्म का विषय गंभीर था और यह पारंपरिक मनोरंजन प्रधान फिल्मों की श्रेणी में नहीं आती थी।

उनके अनुसार, यह एक ऐसी कहानी थी जो समाज के एक संवेदनशील पक्ष को सामने लाती है। इसी कारण इसे बनाने के दौरान रचनात्मक और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

पारिश्रमिक मॉडल पर उठाए सवाल

फिल्म निर्माण से जुड़े अनुभव साझा करते हुए निर्देशक ने फिल्म उद्योग में प्रचलित पारिश्रमिक व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि कई बार फिल्मों के बजट का बड़ा हिस्सा कलाकारों की फीस पर खर्च हो जाता है, जिससे परियोजनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि पारंपरिक फीस मॉडल के बजाय कलाकारों को फिल्म के प्रदर्शन और मुनाफे से जुड़ी हिस्सेदारी पर भी विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, इससे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया अधिक संतुलित और टिकाऊ बन सकती है।

कैसे जन्मा फिल्म का विचार

अभिषेक चौबे ने बताया कि इस फिल्म की मूल अवधारणा कई वर्ष पहले उनके मन में आई थी। उस समय वे नशीले पदार्थों की समस्या पर आधारित एक कहानी विकसित करना चाहते थे। प्रारंभिक स्तर पर इसकी पृष्ठभूमि पूरे देश को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही थी।

बाद में लेखक सुदीप शर्मा के साथ हुई चर्चा के दौरान कहानी के लिए पंजाब को केंद्र में रखने का विचार सामने आया। निर्देशक को यह सुझाव प्रभावी लगा और उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया।

पंजाब क्यों बना कहानी का केंद्र

निर्देशक के अनुसार, पंजाब का सांस्कृतिक और सामाजिक परिवेश कहानी के लिए उपयुक्त था। यहां संगीत संस्कृति की मजबूत मौजूदगी है, वहीं नशे की समस्या भी लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।

उन्होंने बताया कि जब कहानी को पंजाब के संदर्भ में देखा गया, तो इसके विभिन्न पहलू एक-दूसरे से स्वाभाविक रूप से जुड़ने लगे। यही कारण था कि फिल्म की पूरी कथा उसी परिवेश में विकसित की गई।

आज भी चर्चा में है फिल्म

रिलीज़ के वर्षों बाद भी ‘उड़ता पंजाब’ को भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जिन्होंने सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। फिल्म ने न केवल दर्शकों के बीच चर्चा पैदा की, बल्कि फिल्म उद्योग में विषय आधारित सिनेमा को लेकर भी नई बहस शुरू की।

निर्देशक का मानना है कि इस तरह की फिल्मों की सफलता यह दिखाती है कि दर्शक गंभीर और सार्थक विषयों को भी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाए।

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