RehabilitationPlan – झरिया के डेंजर जोन से लोगों को हटाने पर केंद्र ने दिया जोर
RehabilitationPlan – केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे दो दिन के दौरे पर धनबाद पहुंचे, जहां उन्होंने झरिया क्षेत्र में चल रही पुनर्वास योजनाओं और भू-धंसान प्रभावित इलाकों की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने झरिया मास्टर प्लान 2.0 के तहत चल रहे कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ बैठक कर पुनर्वास प्रक्रिया की प्रगति पर चर्चा की। केंद्र सरकार का उद्देश्य डेंजर जोन में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाना है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

झरिया क्षेत्र में लगातार बनी हुई है खतरे की स्थिति
धनबाद और झरिया के कई इलाके लंबे समय से भू-धंसान और भूमिगत गैस रिसाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई स्थानों पर जमीन धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बनी रहती है। मंत्री ने कहा कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में रहना लोगों की सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है। उन्होंने माना कि हालात को देखते हुए पुनर्वास अब केवल एक योजना नहीं बल्कि जरूरी कदम बन चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी इलाके में हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे केंद्र सरकार पर डाली जाती है। ऐसे में जरूरी है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए और इसके लिए सभी एजेंसियां मिलकर काम करें।
झारखंड सरकार के सहयोग पर उठाए सवाल
सतीश चंद्र दुबे ने पुनर्वास प्रक्रिया की धीमी गति के लिए राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विस्थापन और पुनर्वास जैसे बड़े कार्य केवल केंद्र सरकार के प्रयासों से पूरे नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का सक्रिय सहयोग जरूरी है, तभी प्रभावित परिवारों को समय पर सुरक्षित आवास और जरूरी सुविधाएं मिल पाएंगी।
मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि कई योजनाएं तैयार होने के बावजूद जमीन पर उनका प्रभाव उतना नहीं दिख रहा जितनी उम्मीद की गई थी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोगों का भरोसा जीतना और उन्हें नई जगह पर बेहतर जीवन की गारंटी देना सबसे अहम चुनौती है।
बेलगढ़िया टाउनशिप में बढ़ाई जा रही सुविधाएं
पुनर्वास योजना के तहत बेलगढ़िया टाउनशिप को विकसित किया जा रहा है, जहां विस्थापित परिवारों के लिए आवास के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। यहां सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर भी काम चल रहा है।
प्रशासन और बीसीसीएल की ओर से लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा उपलब्ध कराने और कौशल प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि लोगों को रोजगार और स्थायी आय का भरोसा मिलेगा, तो वे पुनर्वास के लिए आगे आएंगे। हालांकि अभी भी कई परिवार अपने पुराने इलाकों को छोड़ने को लेकर असमंजस में हैं।
संवेदनशील इलाकों से लोगों को हटाने की अपील
मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जान-माल की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और खतरे वाले इलाकों में रहना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसी कड़ी में केंदुआडीह-धनबाद-बोकारो मार्ग के कुछ हिस्सों को बंद करने की जरूरत पर भी चर्चा की गई, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार पुनर्वास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और आने वाले समय में प्रभावित परिवारों के लिए सुविधाओं में और सुधार किया जाएगा।