बिहार

Census – बिहार में जनगणना ड्यूटी को लेकर बढ़ी शिक्षकों की मुश्किलें

Census – बिहार में प्रस्तावित जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच व्यवस्थागत खामियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मकान गणना शुरू होने से पहले ही कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनसे शिक्षकों और कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बन गई है। खासकर महिला शिक्षकों की ड्यूटी दूर-दराज इलाकों में लगाए जाने और स्कूल समय के बाद भी जनगणना कार्य कराने के निर्देशों ने विवाद बढ़ा दिया है। शिक्षक संगठनों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए सरकार से व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है।

पटना सहित कई जिलों में महिला शिक्षिकाओं को उनके कार्यस्थल या निवास से कई किलोमीटर दूर क्षेत्रों में प्रगणक के रूप में तैनात किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि जिन इलाकों में उन्हें भेजा गया है, वहां की भौगोलिक और सामाजिक जानकारी सीमित होने के कारण काम प्रभावित हो सकता है। कई शिक्षिकाओं ने सुरक्षा और आवागमन को लेकर भी चिंता जताई है।

दूरस्थ क्षेत्रों में ड्यूटी से बढ़ीं परेशानियां

फुलवारी शरीफ और आसपास के क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि महिला शिक्षकों को 8 से 10 किलोमीटर दूर ड्यूटी पर भेजा गया है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाने के बाद इतने दूर जाकर घर-घर जानकारी जुटाना व्यवहारिक रूप से कठिन है। इसके अलावा कई इलाकों में स्थानीय लोगों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की भी बात कही जा रही है।

शिक्षकों का यह भी कहना है कि एक ओर सरकार ईंधन बचत की अपील कर रही है, वहीं दूसरी ओर लंबी दूरी तय करने वाली ड्यूटी देकर अतिरिक्त खर्च और समय का दबाव बढ़ाया जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है, बल्कि जनगणना कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

स्कूल समय के बाद काम कराने पर सवाल

जनगणना ड्यूटी को लेकर सबसे अधिक विवाद उस आदेश के बाद शुरू हुआ, जिसमें शिक्षकों को स्कूल का कार्य पूरा करने के बाद मकान गणना का काम करने को कहा गया। जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया था कि शिक्षक दोनों जिम्मेदारियों में समन्वय बनाकर काम करें।

हालांकि शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों ने इसे श्रम नियमों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि नियमित शिक्षण कार्य के बाद अतिरिक्त फील्ड ड्यूटी करवाना कर्मचारियों पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है। बाद में एक आदेश वापस भी लिया गया, लेकिन हाल ही में फिर नए निर्देश जारी कर दिए गए, जिनमें विद्यालय अवधि से पहले या बाद में जनगणना कार्य करने को कहा गया है।

दोपहर में घरों में लोग नहीं मिलने की दिक्कत

शिक्षकों का कहना है कि जनगणना जैसे कार्य के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि उस समय परिवार के सदस्य घर पर मिल जाते हैं। लेकिन स्कूल की ड्यूटी के कारण वे सुबह उपलब्ध नहीं हो पाते। दूसरी ओर दोपहर बाद जब वे घर-घर जानकारी लेने जाते हैं, तब अधिकांश लोग नौकरी या अन्य कामों के लिए बाहर रहते हैं।

शिक्षकों का मानना है कि इस कारण आंकड़ों की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। कई प्रगणकों ने यह भी कहा कि दोहरी जिम्मेदारी के कारण वे न तो शिक्षण कार्य पर पूरी तरह ध्यान दे पा रहे हैं और न ही जनगणना कार्य को अपेक्षित समय दे पा रहे हैं।

शिक्षक संगठनों ने उठाई आवाज

राज्य के कई शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जनगणना कार्य के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए या शिक्षकों को पर्याप्त समय और सुविधाएं दी जाएं। उनका कहना है कि जल्दबाजी और असंगठित तरीके से लागू की गई व्यवस्था से भविष्य में प्रशासनिक दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

फिलहाल सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जनगणना से जुड़े निर्देशों और उनकी व्यवहारिकता को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।

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