AfforestationDrive – वन दिवस पर कार्यक्रम में सीएम योगी ने बताए संरक्षण के उपाय
AfforestationDrive – राष्ट्रीय वानिकी संवाद कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाग लेकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की और समाज की भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों, विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी सहभागिता की, जहां वन संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और समाधानों पर विचार साझा किए गए।

प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने पर जोर
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं में प्रकृति को पूजनीय माना गया है। वैदिक काल से ही पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दिया जाता रहा है, लेकिन आधुनिक समय में इस संतुलन में आई कमी के परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि प्रकृति के साथ असंतुलित व्यवहार का असर सीधे जीवन पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हमारे ऋषि-मुनियों ने प्रकृति को ‘मां’ का दर्जा दिया और उसके संरक्षण को मानव का कर्तव्य बताया। ऐसे में वर्तमान पीढ़ी के सामने यह जिम्मेदारी है कि वह अपनी गलतियों से सीख लेकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाए और संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करे।
वृक्षारोपण अभियान में उल्लेखनीय प्रगति
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रहे वृक्षारोपण अभियानों की प्रगति पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य में व्यापक स्तर पर पौधरोपण की तैयारी की गई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में लगभग 50 करोड़ पौधों की उपलब्धता के लिए नर्सरी तैयार की गई हैं, जिससे बड़े स्तर पर वृक्षारोपण संभव हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले नौ वर्षों में राज्य ने 242 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य हासिल किया है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रामसर साइट्स की संख्या में बढ़ोतरी
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में केवल एक रामसर साइट थी, जो अब बढ़कर 11 हो गई हैं। यह वृद्धि जल और जैव विविधता के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि इन स्थलों का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलती है। साथ ही, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
जनभागीदारी से ही संभव है संरक्षण
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि केवल सरकारी प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है। इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे वृक्षारोपण और संरक्षण के अभियानों में शामिल होकर पर्यावरण को सुरक्षित बनाने में योगदान दें।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने भी वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के मुद्दों पर अपने विचार रखे। इस तरह के आयोजनों को पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।