उत्तराखण्ड

UKPSCRecruitment – अध्यक्ष और सदस्यों की कमी से प्रभावित हो रहा लोक सेवा आयोग

UKPSCRecruitment – उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े होने के कारण आयोग के कामकाज पर असर दिखाई देने लगा है। आयोग में जिम्मेदार पदों पर नियुक्तियों के नियम बदले जाने के करीब तीन वर्ष बाद भी न तो स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकी है और न ही सभी सदस्य पद भरे जा सके हैं। स्थिति यह है कि आयोग में स्वीकृत छह सदस्य पदों के मुकाबले फिलहाल केवल तीन सदस्य कार्यरत हैं।

इसका सीधा असर भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है। विशेष रूप से पीसीएस 2024 परीक्षा का अंतिम परिणाम अब तक जारी नहीं हो पाया है, जिससे अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है।

अध्यक्ष पद लंबे समय से खाली

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने जून 2023 में अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनके जाने के बाद आयोग का संचालन अस्थायी व्यवस्था के तहत किया जाता रहा। पहले वरिष्ठ सदस्य डॉ. जगमोहन सिंह राणा और बाद में रविदत्त गोदियाल ने प्रभारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

हाल ही में रविदत्त गोदियाल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आयोग में अध्यक्ष पद पूरी तरह खाली हो गया। आयोग के पास वर्तमान में केवल तीन सदस्य बचे हैं, जिनमें अनिल कुमार राणा, नंदी राजू श्रीवास्तव और डॉ. ऋचा गौड़ शामिल हैं।

नई नियुक्तियों की प्रक्रिया अब तक अधूरी

कार्मिक विभाग ने नवंबर 2023 में आयोग के लिए अध्यक्ष और दो सदस्यों की नियुक्ति हेतु आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे गए थे। नियमों के अनुसार साहित्य, विज्ञान, कला, प्रशासन, समाजसेवा या न्याय क्षेत्र में अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ इन पदों के लिए पात्र माने गए थे।

हालांकि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अब तक किसी नियुक्ति की घोषणा नहीं की गई है। विभाग का कहना है कि चयन प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन लंबे समय से पद खाली रहने पर सवाल उठने लगे हैं।

बदले गए थे चयन से जुड़े नियम

राज्य सरकार ने अगस्त 2023 में आयोग से जुड़ी नियुक्तियों के नियमों में बदलाव किया था। नए प्रावधानों के तहत अध्यक्ष और सदस्यों का चयन अब एक समिति के माध्यम से किया जाना तय हुआ। समिति योग्य उम्मीदवारों के आवेदन की जांच कर अंतिम नाम सरकार को भेजती है।

नए नियमों में यह भी तय किया गया कि चयनित व्यक्ति को अपने पुराने सरकारी या निजी संस्थान से इस्तीफा देना होगा। सरकार का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना बताया गया था, लेकिन अब तक नियुक्तियां पूरी न होने से आयोग में प्रशासनिक दबाव बढ़ गया है।

भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ रहा असर

आयोग में स्थायी अध्यक्ष न होने का असर कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर दिखने लगा है। पीसीएस 2024 परीक्षा का अंतिम परिणाम अभी तक घोषित नहीं हो पाया है। आयोग की प्रक्रिया के अनुसार अंतिम चयन सूची जारी करने से पहले अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक होना जरूरी होती है।

इसके अलावा आगामी भर्तियों और नई परीक्षाओं की समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय तक नियुक्तियां लंबित रहने से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और इससे युवाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

पारदर्शिता और गति बढ़ाने की मांग

राज्य के कई अभ्यर्थी और विशेषज्ञ आयोग में जल्द नियुक्तियां करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में लंबे समय तक पद खाली रहना प्रशासनिक व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। फिलहाल उम्मीदवारों की नजर सरकार और कार्मिक विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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