स्वास्थ्य

Microplastic – नए अध्ययन में दिल की सेहत पर प्लास्टिक कणों को लेकर बढ़ी चिंता

Microplastic- पर्यावरण में तेजी से बढ़ रहे माइक्रोप्लास्टिक को लेकर एक नया अध्ययन सामने आया है, जिसमें संकेत मिले हैं कि ये सूक्ष्म प्लास्टिक कण केवल प्रकृति ही नहीं, बल्कि मानव हृदय की सेहत के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक हो चुका था, उनके रक्त में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कण अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में मौजूद थे। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर बड़े स्तर के और अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है ताकि स्पष्ट निष्कर्ष निकाले जा सकें।

माइक्रोप्लास्टिक क्या हैं और शरीर में कैसे पहुंचते हैं?

माइक्रोप्लास्टिक बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो सामान्य तौर पर प्लास्टिक की बोतलों, पैकेजिंग सामग्री, सिंथेटिक कपड़ों और अन्य प्लास्टिक उत्पादों के टूटने से बनते हैं। इनसे भी छोटे कणों को नैनोप्लास्टिक कहा जाता है, जो शरीर के भीतर गहराई तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने संकेत दिए हैं कि ये कण शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

अध्ययन में क्या सामने आया?

इटली के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में कुल 61 लोगों को शामिल किया गया। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जिन प्रतिभागियों को पहले हार्ट अटैक आया था, उनमें से 84 प्रतिशत के रक्त में माइक्रोप्लास्टिक या नैनोप्लास्टिक कण पाए गए। वहीं, क्रॉनिक इस्केमिक हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत रहा। सामान्य कोरोनरी धमनियों वाले प्रतिभागियों में लगभग 32 प्रतिशत लोगों के रक्त में भी ऐसे कणों की मौजूदगी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह संबंध आगे गहन जांच की मांग करता है।

पॉलीएथिलीन सबसे अधिक मात्रा में मिला

अध्ययन में यह भी पाया गया कि हार्ट अटैक से प्रभावित लोगों के रक्त में कई प्रकार के प्लास्टिक कण मौजूद थे, जिनमें पॉलीएथिलीन सबसे अधिक पाया गया। यही प्लास्टिक आमतौर पर प्लास्टिक बैग, खाद्य पैकेजिंग, बोतलों और घरेलू उपयोग की कई वस्तुओं में इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये कण सीधे हृदय रोग का कारण बनते हैं या केवल उससे जुड़े एक संभावित जोखिम कारक हैं, इसलिए इस दिशा में और शोध की आवश्यकता बनी हुई है।

धूम्रपान और प्रदूषण से बढ़ सकता है जोखिम

शोध के दौरान प्रतिभागियों की जीवनशैली और पर्यावरणीय परिस्थितियों का भी मूल्यांकन किया गया। परिणामों में पाया गया कि जो लोग लंबे समय तक अधिक वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहे, उनके शरीर में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की संभावना अधिक थी। वहीं धूम्रपान करने वाले लोगों में ऐसे कण पाए जाने का जोखिम गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में लगभग छह गुना अधिक दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण कम करना, प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग से बचना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना लंबे समय में स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में सहायक हो सकता है।

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