HumanRights – PoK की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता, की निष्पक्ष जांच की अपील
HumanRights- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हाल के दिनों में बढ़े तनाव और हिंसा की घटनाओं को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा है कि हालिया घटनाओं में हुई मौतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के मूल अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

चुनाव से पहले बढ़े तनाव पर नजर
जिनेवा से जारी आधिकारिक बयान में OHCHR ने कहा कि जुलाई के अंत में प्रस्तावित क्षेत्रीय विधानसभा चुनाव से पहले PoK में विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण घटनाओं में तेजी आई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जून से अब तक हुई विभिन्न घटनाओं में कई लोगों की जान गई है। मृतकों में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के सदस्य दोनों शामिल बताए गए हैं। संगठन ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए सभी संबंधित पक्षों से स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने का आग्रह किया है।
सभी मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि अशांति के दौरान हुई प्रत्येक मौत की परिस्थितियों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि इससे तथ्यों का स्पष्ट पता चल सकेगा और जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस प्रक्रिया को शीघ्र और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने पर जोर दिया ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।
JAAC पर प्रतिबंध को लेकर उठाए सवाल
OHCHR के बयान में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंध का भी उल्लेख किया गया है। जानकारी के अनुसार, इस संगठन में व्यापारी, छात्र, वकील, परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। पाकिस्तान प्रशासन ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया है और उसके कई नेताओं को हिरासत में लिया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस कार्रवाई के प्रभावों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे कदमों का नागरिक स्वतंत्रताओं पर असर पड़ सकता है।
नागरिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया पर जोर
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि किसी संगठन को प्रतिबंधित करने और सार्वजनिक सभाओं पर सख्त रोक लगाने जैसे कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संगठन बनाने के अधिकार जैसे मूलभूत नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करते हैं। साथ ही, गिरफ्तार किए गए JAAC नेताओं को कानूनी सहायता, परिवार से संपर्क और निष्पक्ष सुनवाई सहित सभी विधिक अधिकार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की अपील
OHCHR ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। बयान में कहा गया कि तनावपूर्ण परिस्थितियों में इंटरनेट बंद रहने से लोगों की सूचना तक पहुंच, संवाद और अपनी बात रखने की क्षमता प्रभावित होती है। संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से इंटरनेट सेवाएं बहाल करने और स्थानीय समुदायों की शिकायतों के समाधान के लिए व्यापक एवं समावेशी राजनीतिक संवाद शुरू करने का आग्रह किया। संगठन का मानना है कि स्थायी शांति और स्थिरता का मार्ग संवाद, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है।