उत्तराखण्ड

TempleDonation – बदरीनाथ चढ़ावा मामले में जांच तेज, विधायक ने शुरू किया उपवास

TempleDonation- बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बदरीनाथ के विधायक लखपत बुटोला ने मंगलवार को मंदिर परिसर में समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ शांतिपूर्ण उपवास शुरू किया। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने इस विरोध कार्यक्रम की घोषणा एक दिन पहले ही की थी।

निष्पक्ष जांच की मांग पर आंदोलन

उपवास के दौरान विधायक ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया दान पूरी तरह सुरक्षित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपयोग होना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की अपील की।

सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से खंगाली जा रही पुरानी गतिविधियां

जांच एजेंसियों ने अब मामले की पड़ताल का दायरा बढ़ा दिया है। दो जुलाई को सामने आए कथित घटनाक्रम तक सीमित रहने के बजाय पिछले करीब 40 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह मामला किसी एक दिन की घटना है या पहले भी दान की गणना के दौरान इसी प्रकार की कोई अनियमितता हुई थी। साथ ही यह भी जांच का हिस्सा है कि आरोपी कर्मचारी अकेले काम कर रहा था या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें भूमिका रही।

दान गणना की पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से हर वर्ष दान और चढ़ावे की गणना के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अलग टीम बनाई जाती है। इस वर्ष गठित टीम में संबंधित अधिकारी भी शामिल था। इसी कारण जांच एजेंसियां केवल एक दिन की गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूर्व में हुई गणनाओं के रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण कर रही हैं। जांच के दौरान दान की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियों का भी मिलान किया जा रहा है।

अधिकारी की नियुक्ति और जिम्मेदारियों की भी समीक्षा

जांच में आरोपी अधिकारी की सेवा अवधि और हाल के वर्षों में मिली जिम्मेदारियों को भी देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 में पहली बार उसे बदरीनाथ धाम में तैनाती मिली थी। इसी दौरान उसे दान-चढ़ावे की गणना के साथ प्रोटोकॉल व्यवस्था की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि उस समय कार्य विभाजन और निगरानी व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

सेवानिवृत्ति के बाद खाली पदों पर भी उठे सवाल

मामले में यह पहलू भी सामने आया है कि दान गणना से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन उनकी जगह तत्काल नई नियुक्ति नहीं की गई। ऐसे में दो जुलाई को हुई गणना के दौरान जिम्मेदारियों का वितरण किस प्रकार किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

रिकॉर्ड और कैमरों की मदद से जुटाए जा रहे साक्ष्य

बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ के अनुसार दान गणना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की लगभग 40 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है। जांच टीम एक-एक फुटेज का परीक्षण कर रही है। मंदिर परिसर में लगे 32 कैमरों से प्राप्त रिकॉर्डिंग के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं पूर्व में भी किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं। यदि जांच में किसी अन्य दिन भी नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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