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DentalCare – दांतों की क्लीनिंग को लेकर फैली गलतफहमियों पर विशेषज्ञों ने दी स्पष्ट जानकारी

DentalCare- दांतों की पेशेवर सफाई को लेकर लंबे समय से कई तरह की भ्रांतियां लोगों के बीच बनी हुई हैं। अक्सर यह माना जाता है कि एक बार स्केलिंग कराने के बाद दांत कमजोर हो जाते हैं या उनमें ढीलापन आने लगता है। इसी वजह से कई लोग दांतों पर जमा प्लाक और टार्टर को लंबे समय तक नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि दंत चिकित्सकों का कहना है कि प्रशिक्षित विशेषज्ञ द्वारा की गई डेंटल क्लीनिंग मुंह की स्वच्छता बनाए रखने और कई समस्याओं से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्केलिंग क्या होती है और क्यों की जाती है

डेंटल क्लीनिंग, जिसे स्केलिंग भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विशेष उपकरणों की मदद से दांतों पर जमी प्लाक, टार्टर और बैक्टीरिया की परत हटाई जाती है। सामान्य ब्रशिंग से कई बार यह जमी हुई परत पूरी तरह साफ नहीं हो पाती। समय पर स्केलिंग कराने से मसूड़ों और दांतों की सफाई बेहतर बनी रहती है तथा संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

क्या क्लीनिंग से दांत कमजोर हो जाते हैं

दंत विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा सही नहीं है कि स्केलिंग दांतों को कमजोर बना देती है। यदि यह प्रक्रिया सही तरीके से और योग्य डेंटिस्ट की देखरेख में की जाए तो दांतों की बाहरी सुरक्षा परत को नुकसान नहीं पहुंचता। कुछ लोगों को सफाई के बाद हल्की संवेदनशीलता महसूस हो सकती है, लेकिन यह सामान्य स्थिति होती है और अधिकांश मामलों में कुछ समय बाद स्वयं ठीक हो जाती है।

सफाई के बाद गैप महसूस होने की वजह

कई लोगों को क्लीनिंग के बाद ऐसा लगता है कि दांतों के बीच पहले की तुलना में अधिक जगह बन गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि वास्तव में यह जगह पहले से मौजूद होती है, लेकिन वहां टार्टर जमा होने के कारण उसका एहसास नहीं होता। जब यह कठोर परत हट जाती है, तब दांतों के बीच की वास्तविक संरचना स्पष्ट महसूस होने लगती है।

नियमित डेंटल क्लीनिंग के प्रमुख लाभ

समय-समय पर दांतों की सफाई कराने से मसूड़ों से खून आने की समस्या कम हो सकती है। इसके अलावा मुंह की दुर्गंध घटाने, दांतों पर जमी पीली परत हटाने और मसूड़ों से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करने में भी सहायता मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी मौखिक स्वच्छता लंबे समय तक दांतों को स्वस्थ बनाए रखने में भी मददगार साबित होती है।

कितने अंतराल पर करानी चाहिए सफाई

डेंटल क्लीनिंग की आवश्यकता सभी लोगों में समान नहीं होती। यह व्यक्ति की मौखिक स्वच्छता, खानपान, जीवनशैली और दांतों की स्थिति पर निर्भर करती है। कुछ लोगों के लिए साल में एक बार जांच और सफाई पर्याप्त हो सकती है, जबकि जिनके दांतों पर जल्दी टार्टर जमता है या मसूड़ों से जुड़ी समस्या रहती है, उन्हें दंत चिकित्सक अधिक नियमित अंतराल पर स्केलिंग की सलाह दे सकते हैं।

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए

जिन लोगों के मसूड़ों से ब्रश करते समय खून आता है, दांतों पर बार-बार पीली परत जमा हो जाती है या लगातार मुंह से दुर्गंध की शिकायत रहती है, उन्हें नियमित डेंटल जांच करानी चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज से पीड़ित लोगों और धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने वालों में भी मसूड़ों की बीमारी का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच और सफाई कराना लाभदायक माना जाता है।

क्लीनिंग के बाद किन बातों का रखें ध्यान

डेंटल क्लीनिंग के बाद कुछ समय तक बहुत गर्म या अत्यधिक ठंडी चीजों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है। रोजाना सही तरीके से ब्रश करना, फ्लॉस का उपयोग करना और अधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना मौखिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। साथ ही, दंत चिकित्सक द्वारा निर्धारित समय पर अगली जांच कराना भी जरूरी है ताकि दांत और मसूड़े लंबे समय तक स्वस्थ बने रहें।

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