उत्तराखण्ड

StrayDogs – बढ़ती गर्मी के बीच आक्रामक हो रहे लावारिस कुत्ते, आमने आए की मामले

StrayDogs – देहरादून में हाल के दिनों में लावारिस कुत्तों के हमलों और उनके आक्रामक व्यवहार की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कुछ दिन पहले एक छोटे बच्चे पर कुत्तों के झुंड के हमले की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा सड़कों पर चल रहे दोपहिया वाहनों के पीछे कुत्तों के दौड़ने और लोगों को काटने की कोशिश करने जैसी शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बढ़ती गर्मी और पर्यावरणीय परिस्थितियां कुत्तों के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। अत्यधिक तापमान के कारण उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ सकती है, जिसका असर उनके रोजमर्रा के व्यवहार में दिखाई देता है।

तापमान बढ़ने से बदल रहा व्यवहार

पशु चिकित्सकों के अनुसार, मई और जून के दौरान पड़ने वाली तीव्र गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि जानवरों पर भी पड़ता है। लावारिस कुत्तों को पर्याप्त छाया, स्वच्छ पानी और आरामदायक स्थान नहीं मिल पाता, जिससे वे अधिक तनावग्रस्त हो सकते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी शरीर और मस्तिष्क दोनों पर प्रभाव डालती है। ऐसे में कुछ कुत्तों का व्यवहार सामान्य से अधिक संवेदनशील या आक्रामक हो सकता है। यही कारण है कि वे कभी-कभी बिना किसी स्पष्ट उकसावे के भी प्रतिक्रिया दे देते हैं।

शोध में भी सामने आ चुके हैं संकेत

कुत्तों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर किए गए एक अध्ययन में भी गर्मी और व्यवहारिक बदलाव के बीच संबंध की ओर संकेत किया गया था। शोध के अनुसार, कुत्तों में तापमान बढ़ने पर तनाव से जुड़े हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे उनकी प्रतिक्रियाएं अधिक तीव्र हो जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में कुछ कुत्ते ज्यादा भौंकते हैं, बेचैन रहते हैं या सड़क से गुजरने वाले लोगों और वाहनों पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में इस तरह की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती हैं।

दोपहिया वाहन चालकों को रहती है परेशानी

शहर के कई इलाकों से यह शिकायत भी मिल रही है कि कुत्ते मोटरसाइकिल और स्कूटर के पीछे दौड़ते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई बार वाहन चालक अचानक संतुलन खो बैठते हैं, जिससे चोट लगने की आशंका रहती है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड सक्रिय रहते हैं और रात के समय यह समस्या अधिक गंभीर हो जाती है। ऐसे में लोग प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

शहर में बड़ी संख्या में हैं लावारिस कुत्ते

नगर निगम से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, देहरादून में लावारिस कुत्तों की संख्या काफी अधिक है। शहर में अब तक बड़ी संख्या में कुत्तों का बधियाकरण और टीकाकरण किया जा चुका है, लेकिन यह अभियान अभी भी जारी है। इससे यह संकेत मिलता है कि सड़कों पर रहने वाले कुत्तों की आबादी अभी भी बड़ी है।

प्रशासन और संबंधित एजेंसियां आबादी नियंत्रण और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम चला रही हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम किया जा सके।

विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव मोहन के अनुसार, गर्मी बढ़ने के साथ कुत्तों के व्यवहार में परिवर्तन देखा जाना सामान्य बात है। उन्होंने बताया कि मौसम का प्रभाव उनके स्वभाव पर पड़ता है और कुछ परिस्थितियों में वे अधिक सक्रिय या आक्रामक हो सकते हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि सड़क पर कुत्तों का झुंड दिखाई दे तो उनसे दूरी बनाए रखें, उन्हें उकसाने से बचें और बच्चों पर विशेष निगरानी रखें। इससे संभावित जोखिम को कम किया जा सकता है।

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