उत्तराखण्ड

Kedarnath – पैदल यात्रा सुचारु, अब भी बंद है भूस्खलन के बाद घोड़ा-खच्चर सेवा

Kedarnath- केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा शनिवार को सामान्य रूप से जारी रही, हालांकि छौड़ी क्षेत्र में भारी बोल्डर गिरने के कारण घोड़ा-खच्चर सेवा फिलहाल बंद रखी गई है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित स्थान पर मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि यात्रियों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से जारी रह सके।

राहत और बचाव एजेंसियां लगातार हैं तैनात

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, पैदल मार्ग पर आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। जिन स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, वहां यात्रियों को सुरक्षा मानकों का पालन कराते हुए आगे भेजा जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है।

मलबा हटाने का कार्य जारी

प्रभावित क्षेत्र में भारी बोल्डर और मलबा हटाने का अभियान तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, रास्ता पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने के बाद ही घोड़ा-खच्चर सेवा दोबारा शुरू की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए किसी भी निर्णय में जल्दबाजी नहीं की जाएगी।

खराब मौसम बना चुनौती

केदारघाटी में मौसम अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मौसम की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकतानुसार सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।

यात्रियों के लिए प्रशासन की सलाह

प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताजा जानकारी अवश्य प्राप्त करें। साथ ही प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से रुकने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि खराब मौसम की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करना सभी यात्रियों के हित में है।

सुरक्षा को प्राथमिकता

यात्रा मार्ग पर तैनात टीमें लगातार हालात का आकलन कर रही हैं। यदि मौसम अनुकूल रहता है और प्रभावित स्थान से मलबा पूरी तरह हटा दिया जाता है, तो घोड़ा-खच्चर संचालन फिर से शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने पर केंद्रित है।

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