Electricity – दूसरे के पते पर जारी हुआ बिजली कनेक्शन, सूचना आयोग ने मांगी जांच
Electricity- उत्तराखंड के रुड़की में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग ने एक व्यक्ति के आवासीय पते का उपयोग करते हुए किसी अन्य व्यक्ति के नाम बिजली कनेक्शन जारी कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी वास्तविक पते के मालिक को तब मिली, जब उसी पते पर कनेक्शन विच्छेदन से संबंधित नोटिस पहुंचा। मामला सामने आने के बाद राज्य सूचना आयोग ने इसे गंभीर मानते हुए विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।

नोटिस मिलने के बाद सामने आया मामला
रुड़की निवासी संदीप कुमार के अनुसार, उनके पते से जुड़े एक बिजली कनेक्शन की जानकारी उन्हें वर्षों तक नहीं थी। वर्ष 2025 में जब विभाग की ओर से बिजली आपूर्ति बंद करने का नोटिस उनके पते पर भेजा गया, तब उन्हें पहली बार इस पूरे मामले का पता चला। उनका कहना है कि जिस कनेक्शन की सूचना भेजी गई, उसका उपयोग कई वर्षों तक किया जाता रहा, जबकि वह उनके नाम या उनके उपयोग में नहीं था।
सूचना आयोग में की गई अपील
मामले की जानकारी मिलने के बाद संदीप कुमार ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विभाग ने बिजली कनेक्शन जारी करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्थल का निरीक्षण किया था, तो उनके पते का इस्तेमाल किसी अन्य स्थान के लिए कैसे हो गया। उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी।
आयोग ने माना गंभीर मामला
राज्य सूचना आयोग ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद इस प्रकरण को गंभीर प्रशासनिक चूक की श्रेणी में माना। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया में यह त्रुटि किस स्तर पर हुई। साथ ही यह भी कहा गया है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
विभाग को सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश
आयोग ने बिजली विभाग को निर्देश दिया है कि अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई सभी संबंधित सूचनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएं। आदेश के अनुसार, विभाग को दस दिनों के अंदर आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करानी होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस घटना के बाद बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आम तौर पर नया कनेक्शन देने से पहले स्थल निरीक्षण और पते का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति के पते का उपयोग होने की स्थिति ने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।