CremationConcern – केदारघाट पर अधजले शवों से बढ़ी आवारा कुत्तों की समस्या
CremationConcern – उत्तरकाशी के मुख्य केदारघाट पर एक गंभीर स्थिति सामने आई है, जहां भागीरथी नदी के किनारे अधजले शवों के अवशेष खुले में पड़े रहने से आवारा कुत्तों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अंतिम संस्कार के बाद शेष अवशेषों का समुचित निस्तारण नहीं किया जा रहा, जिसके चलते यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि घाट के आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है और लोगों में चिंता का माहौल है।

अधजले अवशेषों से बढ़ी परेशानी
स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों के अनुसार, कई बार अंतिम संस्कार के बाद शवों के कुछ हिस्से पूरी तरह नहीं जल पाते और उन्हें वहीं छोड़ दिया जाता है। ऐसे अवशेष खुले में पड़े रहने से आवारा कुत्ते उन्हें खाने लगते हैं। इससे न केवल धार्मिक स्थल की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी गंभीरता बढ़ी है।
आवारा कुत्तों के व्यवहार में बदलाव
सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस तरह के हालात का असर कुत्तों के व्यवहार पर भी पड़ रहा है। जब उन्हें मानव अवशेषों का स्वाद मिल जाता है, तो वे अधिक आक्रामक हो सकते हैं। हाल ही में आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। जानकारी के अनुसार, बीते दिनों कई लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल किया, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया है।
कोविड काल जैसी स्थिति फिर दिखने लगी
गंगा विचार मंच से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस तरह की स्थिति कोविड के दौरान भी देखने को मिली थी, जब प्रतिबंधों के चलते अंतिम संस्कार प्रक्रियाएं प्रभावित थीं। हालांकि अब परिस्थितियां सामान्य हैं, इसके बावजूद घाट पर वैसी ही स्थिति दोबारा देखने को मिल रही है। यह दर्शाता है कि व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि घाट पर अंतिम संस्कार के बाद सफाई की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके प्रबंधन के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं, ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
समन्वित प्रयासों से ही समाधान संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ही संभव है। अंतिम संस्कार से जुड़े सभी लोगों को जिम्मेदारी के साथ अवशेषों का निस्तारण करना चाहिए। साथ ही, नगर निकायों को भी नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था को सख्ती से लागू करना होगा, ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।



